भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड यानी CSL में भारतीय नौसेना के पहले नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल यानी NGMV की कील रखी गई। यह कार्यक्रम 18 सितंबर 2026 को आयोजित किया गया, जिसमें नौसेना और शिपयार्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस परियोजना के तहत भारतीय नौसेना के लिए कुल छह अत्याधुनिक मिसाइल पोत तैयार किए जाने हैं।
कील रखना किसी भी जहाज के निर्माण में एक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि जहाज का निर्माण प्रारंभिक तैयारी से आगे बढ़कर वास्तविक संरचनात्मक निर्माण के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। पहले NGMV के लिए स्टील कटिंग का कार्यक्रम दिसंबर 2024 में आयोजित किया गया था। अब कील रखे जाने के बाद जहाज के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और आने वाले समय में इसमें विभिन्न प्रणालियों और उपकरणों को स्थापित किया जाएगा।
NGMV परियोजना के लिए भारतीय नौसेना और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के बीच मार्च 2023 में अनुबंध हुआ था। इस अनुबंध के तहत छह पोत बनाए जाने हैं। कोचीन शिपयार्ड के अनुसार, इस परियोजना का मूल्य लगभग 9,804 करोड़ रुपये है। परियोजना भारतीय नौसेना के लिए तेज गति वाले और आधुनिक हथियारों तथा सेंसर से लैस पोत उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस अवसर पर वाइस एडमिरल संजय साधु, कंट्रोलर ऑफ वॉरशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन, मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। नौसेना और कोचीन शिपयार्ड के कई वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। अधिकारियों की मौजूदगी में पहले NGMV की निर्माण प्रक्रिया में एक नया चरण शुरू हुआ।
इन मिसाइल पोतों की सबसे बड़ी विशेषताओं में उनकी गति और हथियार प्रणालियां शामिल हैं। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, NGMV में सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम, एयर-सर्विलांस रडार और फायर-कंट्रोल रडार जैसी प्रणालियां शामिल की जानी हैं। इन उपकरणों का उद्देश्य पोत को समुद्री क्षेत्र में निगरानी, लक्ष्य पहचान और आवश्यक कार्रवाई के लिए आधुनिक क्षमता प्रदान करना है।
इन पोतों का इस्तेमाल कई तरह के समुद्री अभियानों में किया जा सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, इनका उपयोग एंटी-सर्फेस वारफेयर यानी दुश्मन के सतही जहाजों के खिलाफ अभियान, समुद्री हमले, स्थानीय नौसैनिक सुरक्षा और समुद्र में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा जैसे कार्यों में किया जा सकता है। इस तरह NGMV को भारतीय नौसेना की भविष्य की सतही युद्धक क्षमता के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इन जहाजों की तेज गति भी इनके डिजाइन की एक महत्वपूर्ण विशेषता बताई जाती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, NGMV की अधिकतम गति लगभग 33 नॉट तक हो सकती है। तेज गति के कारण ऐसे पोत समुद्री क्षेत्र में तेजी से अपनी स्थिति बदलने और आवश्यकता पड़ने पर किसी क्षेत्र तक जल्दी पहुंचने में सक्षम हो सकते हैं।
NGMV परियोजना केवल नौसेना की परिचालन क्षमता से जुड़ी परियोजना नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन अभियान के लिए भी महत्वपूर्ण है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन पोतों में इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण उपकरण और प्रणालियां देश में ही विकसित और निर्मित की जा रही हैं। यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसी पहलों के अनुरूप है।
कोचीन शिपयार्ड के लिए भी यह परियोजना विशेष महत्व रखती है। छह आधुनिक मिसाइल पोतों का निर्माण करने से शिपयार्ड की उन्नत युद्धपोत निर्माण क्षमता में वृद्धि होगी। इस तरह की परियोजनाओं में केवल जहाज का ढांचा तैयार करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसमें रडार, हथियार, संचार प्रणाली, इंजन और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों का एकीकरण भी किया जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि परियोजना में दूसरे पोत का निर्माण भी आगे बढ़ रहा है। 17 सितंबर 2026 को दूसरे NGMV के लिए स्टील कटिंग की गई थी, जबकि एक दिन बाद पहले पोत की कील रखी गई। इससे पता चलता है कि छह पोतों वाली इस परियोजना पर निर्माण गतिविधियां एक साथ आगे बढ़ाई जा रही हैं।
भारतीय नौसेना के लिए इस परियोजना का महत्व इसलिए भी है क्योंकि समुद्री सुरक्षा के बदलते वातावरण में अलग-अलग प्रकार के युद्धपोतों की जरूरत होती है। बड़े युद्धपोतों के साथ तेज गति वाले और आधुनिक मिसाइल प्रणालियों से लैस छोटे या मध्यम आकार के पोत भी विशेष परिस्थितियों में भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि, अभी पहले NGMV का निर्माण पूरा होना बाकी है। कील रखे जाने के बाद जहाज के ढांचे का निर्माण, विभिन्न उपकरणों की स्थापना, सिस्टम इंटीग्रेशन और परीक्षण जैसे कई चरण पूरे किए जाएंगे। इसके बाद समुद्री परीक्षणों के माध्यम से पोत की अलग-अलग प्रणालियों और उसकी परिचालन क्षमता की जांच की जाएगी।
छह NGMV पोतों के तैयार होने के बाद भारतीय नौसेना के पास तेज गति और आधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस एक नई श्रेणी के युद्धक पोत होंगे। इससे नौसेना की समुद्री निगरानी, सतही युद्ध और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी क्षमताओं में एक नया प्लेटफॉर्म जुड़ जाएगा।
कोच्चि में पहले NGMV की कील रखा जाना इसलिए केवल एक औपचारिक समारोह नहीं है। यह भारत की युद्धपोत निर्माण क्षमता, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में चल रही प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। अब परियोजना की अगली बड़ी मंजिल जहाज के निर्माण को पूरा करना, प्रणालियों का एकीकरण और समुद्री परीक्षण होगी।
