नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (MSIL) ने बढ़ती कमोडिटी कीमतों के चलते अपने वाहनों की कीमतों में इजाफे के संकेत दिए हैं। कंपनी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (विपणन एवं बिक्री) पार्थो बनर्जी ने कहा कि कच्चे माल, विशेषकर कीमती धातुओं की लागत में तेज़ बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिस पर कंपनी लगातार नजर बनाए हुए है।
सोमवार को एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में बनर्जी ने बताया कि जीएसटी दरों में कटौती के बाद बाजार में मांग मजबूत बनी हुई है, लेकिन उत्पादन संबंधी चुनौतियों के कारण कंपनी के पास इस समय लगभग 1.75 लाख वाहनों के लंबित ऑर्डर हैं। केवल जनवरी महीने में ही कंपनी को 2.78 लाख बुकिंग मिली है।
कीमतें बढ़ाने की संभावना पर उन्होंने कहा कि कंपनी हमेशा कोशिश करती है कि लागत बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर कम से कम डाला जाए। आपूर्ति श्रृंखला और उत्पादन टीमें इस बात का आकलन कर रही हैं कि बढ़ी हुई लागत का कितना हिस्सा कंपनी स्वयं वहन कर सकती है। हालांकि, यदि लागत एक सीमा से अधिक बढ़ती है, तो कीमतों में संशोधन करना अपरिहार्य हो सकता है।
बनर्जी ने बताया कि जनवरी में कंपनी ने रिकॉर्ड 2,36,963 इकाइयों की कुल बिक्री दर्ज की, जबकि निर्यात भी बढ़कर 51,020 इकाई के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। कंपनी को प्रतिदिन औसतन 9,000 से 10,000 बुकिंग मिल रही हैं।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मारुति की नई एसयूवी ‘विक्टोरिस’ ने मात्र पांच महीनों में 50,000 यूनिट बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया है। वहीं, इलेक्ट्रिक एसयूवी ‘ई-विटारा’ को इसी महीने घरेलू बाजार में लॉन्च किया जाएगा।
उत्पादन क्षमता को लेकर बनर्जी ने कहा कि हरियाणा के खरखौदा में कंपनी का दूसरा संयंत्र अप्रैल 2026 तक शुरू हो जाएगा। इसके बाद गुजरात संयंत्र में चौथी उत्पादन लाइन शुरू की जाएगी, जिससे सालाना 5 लाख इकाई की अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की उम्मीद है।
मोटर वाहन उद्योग के भविष्य पर उन्होंने कहा कि उद्योग एक बार फिर 6–7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर की ओर लौट सकता है, हालांकि बढ़ती कमोडिटी कीमतें और भू-राजनीतिक हालात फिलहाल चिंता का विषय बने हुए हैं।
