पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगालमें वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने SIR से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए हर जिले में रीजनल ट्रिब्यूनल बनाने और क्लेम-ऑब्जेक्शन यानी दावा और आपत्ति दर्ज कराने की समयसीमा कम से कम छह महीने बढ़ाने की मांग की है।
गुट ने कहा है कि अगर असली वोटरों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो वह प्रभावित लोगों के साथ आंदोलन करने के अलावा कोर्ट का रुख भी कर सकता है।
हर जिले और जरूरत पड़ने पर ब्लॉक स्तर पर ट्रिब्यूनल की मांग
रीताब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले TMC गुट के 13 सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सचिवालय नबन्ना में मुख्यमंत्री के साथ बैठक की। इस दौरान SIR समेत कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक के बाद रीताब्रत बनर्जी ने कहा कि मौजूदा ट्रिब्यूनल व्यवस्था से दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले वोटरों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि कोलकाता के दक्षिणी बाहरी इलाके जोका में सिर्फ एक रीजनल ट्रिब्यूनल बनाए जाने का प्रस्ताव है। ऐसे में उत्तर बंगाल के कूच बिहार समेत दूर के जिलों में रहने वाले लोगों के लिए सुनवाई में शामिल होने या जरूरी दस्तावेज जमा करने के लिए जोका पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
इसी वजह से गुट ने हर जिले में और जरूरत पड़ने पर ब्लॉक स्तर पर भी रीजनल ट्रिब्यूनल बनाने की मांग की है।
Claim और Objection की समयसीमा 6 महीने बढ़ाने की मांग
रीताब्रत बनर्जी गुट ने SIR प्रक्रिया के तहत क्लेम और ऑब्जेक्शन की समयसीमा कम से कम छह महीने बढ़ाने की मांग की है।
गुट का कहना है कि बड़ी संख्या में वास्तविक वोटर अभी भी SIR प्रक्रिया को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं या किसी वजह से इसे पूरा नहीं कर सके हैं। बनर्जी ने कहा कि अगर सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती है तो प्रभावित लोगों के साथ बड़ा आंदोलन शुरू किया जा सकता है।
करीब 27 लाख लोगों को लेकर दावा
रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट के चीफ व्हिप अखरुज्जमां ने दावा किया कि राज्य में करीब 27 लाख लोग वोटर लिस्ट रिविजन प्रक्रिया को लेकर परेशान हैं।
उन्होंने कहा कि उनका गुट गैर-कानूनी या फर्जी वोटरों का समर्थन नहीं करता, लेकिन ऐसे वोटरों की पहचान करते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वास्तविक भारतीय नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित न हों।
अखरुज्जमां के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने बैठक में बताया कि करीब 7 लाख लोग आवेदन जमा कर चुके हैं। वहीं, गुट के अनुमान के अनुसार करीब 20 लाख योग्य वोटर अभी भी इस प्रक्रिया को ठीक से नहीं समझ पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इन लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया जाएगा।
SIR को लेकर पहले से जारी है विवाद
पश्चिम बंगाल में SIR पहले से ही एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। रीताब्रत बनर्जी गुट का आरोप है कि अगर वोटरों की सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था नहीं की गई तो वास्तविक वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटने का खतरा हो सकता है।
वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि SIR प्रक्रिया का उद्देश्य साफ और सही वोटर लिस्ट तैयार करना है।
लाउडस्पीकर हटाने का मुद्दा भी उठा
बैठक के दौरान धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। रीताब्रत बनर्जी ने कहा कि धर्म मानने और उसका पालन करने के संवैधानिक अधिकार को पर्यावरण से जुड़े नियमों के साथ संतुलित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर आवाज का स्तर तय 65 डेसिबल की सीमा के अंदर रहता है तो धार्मिक स्थलों पर माइक्रोफोन या लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
रीताब्रत बनर्जी गुट ने बताया कि वह लाउडस्पीकर के इस्तेमाल से जुड़े 2020 के फैसले के खिलाफ जल्द ही कलकत्ता हाई कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करेगा।
