सीरिया में असद युग का अंत अदालत तक पहुंचा, बशर अल-असद और अतेफ नजीब को मौत की सजा

सीरिया में असद युग का अंत अदालत तक पहुंचा, बशर अल-असद और अतेफ नजीब को मौत की सजा

Spread the love

सीरिया में लंबे समय तक सत्ता पर काबिज रहे पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के लिए उनकी राजनीतिक हार के बाद अब कानूनी मोर्चे पर भी बड़ा झटका लगा है। एक सीरियाई अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद, उनके भाई माहेर अल-असद और उनके चचेरे भाई अतेफ नजीब को मौत की सजा सुनाई है। इस फैसले को सीरिया के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और असाधारण न्यायिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। बशर अल-असद और माहेर अल-असद को उनकी गैरमौजूदगी में दोषी ठहराया गया, जबकि अतेफ नजीब अदालत में मौजूद थे।

यह मामला केवल तीन लोगों की सजा तक सीमित नहीं है, बल्कि सीरिया में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व शासन के खिलाफ जवाबदेही की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है। बशर अल-असद ने लगभग 25 वर्षों तक सीरिया की सत्ता संभाली। उनके शासन के दौरान सरकार के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों और सैन्य तंत्र के इस्तेमाल के आरोप लगते रहे। 2011 में शुरू हुए विद्रोह और उसके बाद चले लंबे गृहयुद्ध ने सीरिया को गहरे मानवीय और राजनीतिक संकट में धकेल दिया।

इस मामले में अतेफ नजीब की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वह 2011 में दक्षिणी सीरिया के दारा क्षेत्र में राजनीतिक सुरक्षा शाखा के प्रमुख थे। यही इलाका सीरिया में सरकार विरोधी आंदोलन की शुरुआत के प्रमुख केंद्रों में शामिल था। दारा में कुछ किशोरों को सरकार विरोधी नारे लिखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनकी कथित प्रताड़ना की खबर सामने आने के बाद लोगों में भारी गुस्सा फैल गया और विरोध प्रदर्शन तेज होते चले गए।

शुरुआत में प्रदर्शन राजनीतिक सुधार और अधिक स्वतंत्रता की मांग को लेकर थे, लेकिन सुरक्षा बलों की कार्रवाई और बढ़ते तनाव ने हालात को तेजी से बिगाड़ दिया। कुछ ही समय में विरोध आंदोलन देश के दूसरे हिस्सों में फैल गया। बाद में यह संघर्ष सशस्त्र विद्रोह और लंबे गृहयुद्ध में बदल गया।

अतेफ नजीब पर दारा में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़े आरोप लगाए गए। सुनवाई के दौरान उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और कथित तौर पर गोलीबारी की जिम्मेदारी दूसरे सुरक्षा बलों पर डालने की कोशिश की। इसके बावजूद अदालत ने उन्हें गंभीर अपराधों के लिए दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई।

बशर अल-असद और माहेर अल-असद की स्थिति इससे अलग है। दोनों सीरिया से बाहर हैं और अदालत में मौजूद नहीं थे। बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद उनके रूस में रहने की खबरें सामने आई थीं। ऐसे में अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को लागू करना व्यावहारिक रूप से आसान नहीं होगा। जब तक पूर्व राष्ट्रपति सीरियाई अधिकारियों की हिरासत में नहीं आते, तब तक सजा मुख्य रूप से न्यायिक और राजनीतिक महत्व रखेगी।

माहेर अल-असद को भी पूर्व शासन के सैन्य और सुरक्षा ढांचे में एक प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता था। उन पर सरकार की सैन्य कार्रवाइयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के आरोप लगते रहे हैं। इसलिए अदालत द्वारा उनका नाम भी मौत की सजा पाने वालों में शामिल करना पूर्व शासन के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ कार्रवाई के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

इस फैसले का सबसे बड़ा असर सीरिया की ट्रांजिशनल जस्टिस यानी संक्रमणकालीन न्याय व्यवस्था पर पड़ सकता है। युद्ध और राजनीतिक संघर्ष के बाद किसी देश के लिए केवल सत्ता परिवर्तन पर्याप्त नहीं होता। पीड़ित परिवारों को न्याय, लापता लोगों के बारे में जानकारी और कथित अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जरूरत होती है।

हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर कानूनी सवाल भी उठ रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने मुकदमों की प्रक्रिया, गैरमौजूदगी में सुनवाई और अपराधों की कानूनी श्रेणी जैसे मुद्दों पर चिंता जताई है। ऐसे में आने वाले समय में इन फैसलों की कानूनी वैधता और प्रक्रिया पर भी बहस हो सकती है।

फिर भी, पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक कदम है। जिन लोगों ने वर्षों तक अपने परिजनों की गिरफ्तारी, गुमशुदगी या मौत का दर्द झेला, उनके लिए पूर्व शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत के सामने देखना एक बड़ा बदलाव है।

बशर अल-असद के खिलाफ मौत की सजा इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि जिस व्यक्ति ने कभी पूरे सीरिया की सत्ता और सुरक्षा व्यवस्था को नियंत्रित किया था, वही अब एक अदालत के फैसले का सामना कर रहा है। लेकिन असली चुनौती अभी बाकी है। सीरिया को यह साबित करना होगा कि पूर्व शासन के खिलाफ चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और कानून के आधार पर होगी।

इस फैसले को इसलिए केवल असद परिवार के खिलाफ कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह सीरिया के उस लंबे संघर्ष का नया अध्याय है जिसमें देश अब अपने अतीत के अपराधों का हिसाब लेने की कोशिश कर रहा है। आने वाले वर्षों में यह तय होगा कि यह फैसला वास्तविक न्याय की शुरुआत बनता है या केवल एक ऐतिहासिक और राजनीतिक प्रतीक बनकर रह जाता है।

author

अंजली सिंह

अंजली सिंह उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद की एक भारतीय पत्रकार हैं। वे नई दिल्ली में रहती हैं।

संबंधित पोस्ट