नई दिल्ली: पपीते की पत्तियों (Carica Papaya Leaf Extract – CPLE) को लेकर हाल ही में प्रकाशित एक रिसर्च मेडिकल जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है। टाटा मेमोरियल सेंटर (TMC) की क्लीनिकल ट्रायल में दावा किया गया कि कैरिका पपाया लीफ एक्सट्रैक्ट (CPLE)कीमोथेरेपी करा रहे मरीजों में प्लेटलेट्स तेजी से रिकवर करने में मदद कर सकता है। हालांकि, इस रिसर्च पर अब सवाल भी उठने लगे हैं और संबंधित जर्नल ने इसकी समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है।
रिसर्च में क्या दावा किया गया?
यह अध्ययन Journal of Clinical Oncology – Global Oncology में प्रकाशित हुआ था। रिसर्च में करीब 200 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया, जिनकी कीमोथेरेपी के दौरान प्लेटलेट्स का स्तर काफी कम हो गया था।
शोधकर्ताओं के अनुसार, जिन मरीजों को CPLE दिया गया, उनमें प्लेटलेट्स का स्तर चौथे दिन से ही प्लेसीबो ग्रुप की तुलना में तेजी से बढ़नेलगा।
स्टडी में यह भी दावा किया गया कि:
- CPLE लेने वाले केवल 25% मरीजों को कीमोथेरेपी में देरी या दवा की डोज कम करनी पड़ी।
- जबकि प्लेसीबो ग्रुप में यह आंकड़ा 43% रहा।
- रिसर्च के दौरान किसी गंभीर साइड इफेक्ट की जानकारी नहीं मिली।
- लगभग 10 दिन का सपोर्टिव ट्रीटमेंट करीब 300 रुपये में पूरा हो सकता है।
रिसर्च पर क्यों उठे सवाल?
केरल के हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. साइरिएक एबी फिलिप्स ने सोशल मीडिया पर इस स्टडी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और संभावित गड़बड़ियों की आशंका जताई।
इसके बाद संबंधित जर्नल ने इस रिसर्च पर “Expression of Concern” जारी किया। इसका अर्थ यह नहीं है कि रिसर्च को गलत या फर्जी घोषित कर दिया गया है, बल्कि जर्नल फिलहाल उठाए गए वैज्ञानिक सवालों की जांच कर रहा है।
टाटा मेमोरियल सेंटर का क्या कहना है?
टाटा मेमोरियल सेंटर के वैज्ञानिकों का कहना है कि Expression of Concern केवल समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे किसी प्रकार की वैज्ञानिक धोखाधड़ी का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
स्टडी के सह-लेखक और वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. कुमार प्रभाष ने कहा कि यह शोध पूरी तरह वैज्ञानिक मानकों के अनुसार किया गया और अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यू के बाद प्रकाशित हुआ। उन्होंने बताया कि इस रिसर्च को 2025 में American Society of Clinical Oncology (ASCO) की वार्षिक बैठक में भी प्रस्तुत किया गया था।
प्रमुख रिसर्चर ने क्या कहा?
मुख्य शोधकर्ता डॉ. विकास ओस्टवाल ने कहा कि उनकी टीम अपने निष्कर्षों पर कायम है। उनके अनुसार, जर्नल ने अब तक रिसर्च टीम से कोई वैज्ञानिक स्पष्टीकरण नहीं मांगा है। यदि भविष्य में कोई प्रश्न उठता है, तो उसका जवाब वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत दिया जाएगा।
TMC के एक अन्य ऑन्कोलॉजिस्ट ने भी कहा कि किसी भी रिसर्च पर सवाल उठाना वैज्ञानिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष सोशल मीडिया पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक जांच और ठोस सबूतों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
फिलहाल क्या है निष्कर्ष?
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा रिसर्च के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि पपीते की पत्तियां कैंसर का इलाज हैं। हालांकि, यह अध्ययन कीमोथेरेपी के दौरान प्लेटलेट्स रिकवरी में संभावित सहायक उपचार (Supportive Therapy) के रूप में CPLE की भूमिका की ओर संकेत करता है। अंतिम निष्कर्ष जर्नल की समीक्षा और आगे की वैज्ञानिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
