दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर को कथित तौर पर निशाना बनाने की एक बड़ी आतंकी साजिश का खुलासा सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते कर दिया। जांच अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले में सबसे अहम सुराग आरोपी की प्रेमिका के सोशल मीडिया अकाउंट से मिला। डिजिटल फॉरेंसिक जांच और साइबर निगरानी के जरिए एजेंसियों ने ऐसे कई ऑनलाइन संकेत जुटाए, जिन्होंने कथित साजिश की परतें खोल दीं। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि आज के दौर में सोशल मीडिया केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण सबूत भी बन चुका है।
जानकारी के अनुसार, खुफिया एजेंसियों को पहले से ही एक संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधियों को लेकर इनपुट मिले थे। शुरुआती जांच में उसके कुछ कट्टरपंथी तत्वों से संपर्क होने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी। उसके फोन रिकॉर्ड, यात्रा विवरण, बैंक लेन-देन और डिजिटल गतिविधियों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान अधिकारियों ने उसके करीबी लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट भी खंगालने शुरू किए।
जांच के दौरान आरोपी की प्रेमिका का सोशल मीडिया अकाउंट एजेंसियों के रडार पर आया। पहली नजर में उसकी पोस्ट सामान्य दिखाई दीं, जिनमें यात्रा की तस्वीरें, निजी जीवन से जुड़े फोटो और रोजमर्रा की गतिविधियां शामिल थीं। लेकिन साइबर विशेषज्ञों ने जब इन पोस्ट का गहराई से विश्लेषण किया तो कई ऐसे पैटर्न सामने आए, जिन्होंने अधिकारियों का ध्यान खींच लिया।
जांच अधिकारियों के अनुसार, कुछ पोस्ट में ऐसे लोकेशन टैग थे जो बार-बार सामने आ रहे थे। कुछ तस्वीरों का समय और स्थान पहले से जुटाई गई खुफिया जानकारी से मेल खा रहा था। इसके अलावा कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स के साथ लगातार संपर्क भी पाया गया, जो पहले से जांच एजेंसियों की निगरानी में थे। इन सभी तथ्यों ने जांच को नई दिशा दी।
डिजिटल फॉरेंसिक टीम ने सोशल मीडिया पोस्ट, मेटाडाटा, लोकेशन हिस्ट्री, मैसेजिंग रिकॉर्ड और अन्य ऑनलाइन गतिविधियों का विस्तार से विश्लेषण किया। जांच के दौरान कथित तौर पर ऐसे संकेत मिले कि दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके की रेकी की गई थी। अधिकारियों को शक हुआ कि यह स्थान संभावित निशाने के रूप में चुना गया था।
जंतर-मंतर राजधानी दिल्ली का एक प्रमुख सार्वजनिक स्थल है, जहां अक्सर राजनीतिक प्रदर्शन, धरने, सामाजिक अभियान और बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियां इसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र मानती हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि यहां किसी तरह का हमला होता, तो भारी जनहानि और अफरा-तफरी मच सकती थी।
इन इनपुट्स के बाद दिल्ली पुलिस, केंद्रीय खुफिया एजेंसियों, आतंकवाद निरोधक इकाइयों और साइबर विशेषज्ञों ने संयुक्त अभियान शुरू किया। संदिग्ध की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी गई। उसके संपर्कों, यात्रा, फोन कॉल, इंटरनेट गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन की जांच की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित साजिश किस चरण में थी।
पर्याप्त सबूत मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तारी की पूरी कार्रवाई बेहद सावधानी से की गई ताकि आम जनता की सुरक्षा पर कोई खतरा न आए। इसके साथ ही आरोपी से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी भी की गई।
छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, दस्तावेज और कुछ हस्तलिखित नोट्स बरामद किए गए। इन सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। विशेषज्ञ डिलीट किए गए डेटा, एन्क्रिप्टेड चैट, इंटरनेट हिस्ट्री और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड को रिकवर करने की कोशिश कर रहे हैं।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके पीछे किसी बड़े आतंकी नेटवर्क का हाथ था। विदेशों से किसी तरह की फंडिंग, ऑनलाइन संपर्क, यात्रा रिकॉर्ड और अन्य संदिग्ध गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
आरोपी की प्रेमिका से भी पूछताछ की जा रही है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल उसके खिलाफ किसी तरह की आपराधिक संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उसे आरोपी की कथित योजना की जानकारी थी या उसकी सोशल मीडिया गतिविधियां केवल जांच का एक महत्वपूर्ण सुराग साबित हुईं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला बताता है कि आज के समय में डिजिटल दुनिया कितनी महत्वपूर्ण हो गई है। सोशल मीडिया पोस्ट, लोकेशन डेटा, मैसेजिंग ऐप, क्लाउड स्टोरेज और ऑनलाइन गतिविधियां जांच एजेंसियों को ऐसे सुराग देती हैं जो पारंपरिक जांच में आसानी से सामने नहीं आते। आधुनिक तकनीक की मदद से डिलीट किए गए डेटा को भी रिकवर किया जा सकता है और संदिग्धों के बीच संबंधों का पता लगाया जा सकता है।
घटना के बाद दिल्ली के कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जंतर-मंतर सहित भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। सीसीटीवी निगरानी बढ़ाई गई है और सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा की जा रही है।
अधिकारियों ने कहा है कि जांच अभी जारी है और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद कई नए खुलासे हो सकते हैं। यदि जांच में किसी और की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि आतंकवाद से निपटने में अब केवल पारंपरिक खुफिया जानकारी ही नहीं, बल्कि डिजिटल जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। सोशल मीडिया पर छोड़े गए छोटे-छोटे डिजिटल निशान भी बड़े अपराधों का पर्दाफाश करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। आने वाले दिनों में जांच पूरी होने के बाद इस कथित साजिश से जुड़े और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है।
