SIR के बाद देवबंद विधानसभा सीट पर घटे 27 हजार से ज्यादा वोटर

SIR के बाद देवबंद विधानसभा सीट पर घटे 27 हजार से ज्यादा वोटर

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सहारनपुर: उत्तर प्रदेश की सहारनपुर जिले की देवबंद विधानसभा सीट प्रदेश की चर्चित सीटों में शामिल है। धार्मिक और राजनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाने वाली इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच मुकाबला देखने को मिलता रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के बृजेश सिंह ने सपा के कार्तिकेय राणा को हराकर जीत दर्ज की थी।

SIR के बाद देवबंद में 27,633 मतदाता घटे

2026 में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद देवबंद विधानसभा सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 3,16,497 रह गई है। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान इस सीट पर कुल 3,44,130 मतदाता थे। यानी SIR के बाद देवबंद विधानसभा क्षेत्र में 27,633 मतदाताओं की कमीहुई है।

2022 में बीजेपी ने 7,104 वोटों से दर्ज की थी जीत

2022 के विधानसभा चुनाव में देवबंद सीट पर बीजेपी के बृजेश सिंह को 93,890 वोट मिले थे। सपा के कार्तिकेय राणा को 86,786, बसपा के राजेंद्र सिंह चौधरी को 52,732 और कांग्रेस के राहत खलील को 1,096 वोट मिले थे।

बृजेश सिंह ने सपा उम्मीदवार कार्तिकेय राणा को 7,104 वोटों से हराया था। वोट प्रतिशत की बात करें तो बीजेपी को 38.77 फीसदी, सपा को 35.83 फीसदी, बसपा को 21.77 फीसदी और कांग्रेस को 0.45 फीसदी वोट मिले थे।

2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी की बढ़ी बढ़त

2024 के लोकसभा चुनाव में भी देवबंद विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी गठबंधन का प्रदर्शन मजबूत रहा। यहां बीजेपी गठबंधन को 94,289 वोट, सपा गठबंधन को 73,238 वोट और बसपा को 48,243 वोट मिले।

इस तरह बीजेपी गठबंधन ने सपा-कांग्रेस गठबंधन पर 21,051 वोटों की बढ़त बनाई। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत का अंतर 7,104 वोट था, जबकि 2024 में यह अंतर बढ़कर 21 हजार से ज्यादा हो गया।

बसपा भी अपने पारंपरिक वोट बैंक को काफी हद तक बनाए रखने में सफल रही। हालांकि 2022 की तुलना में 2024 में पार्टी को 4,489 वोट कम मिले।

देवबंद का जातीय समीकरण क्या कहता है?

देवबंद विधानसभा सीट के चुनावी समीकरण में मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ी संख्या में हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यहां करीब 95 हजार मुस्लिम वोटर हैं। इसके बाद लगभग 58 हजार एससी, 40 हजार सैनी, 35 हजार क्षत्रिय, 30 हजार कश्यप और 25 हजार गुर्जर मतदाता बताए जाते हैं।

इसके अलावा करीब 19 हजार त्यागी, 5 हजार ब्राह्मण, 5 हजार वैश्य और 5 हजार जाट मतदाता भी हैं।

देवबंद में मुस्लिम और एससी मतदाताओं के साथ-साथ ओबीसी और अति पिछड़ा वर्ग भी चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सामान्य वर्ग के मतदाताओं की संख्या भी इस सीट पर काफी प्रभावशाली है।

बीजेपी और सपा के लिए क्यों अहम है देवबंद?

देवबंद सीट पर बीजेपी को ओबीसी और सामान्य वर्ग के समर्थन से मजबूती मिलती रही है, जबकि समाजवादी पार्टी का आधार मुख्य रूप से मुस्लिम और ओबीसी वोटों पर माना जाता है। 2022 में दोनों प्रमुख दलों ने क्षत्रिय समाज से आने वाले उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था और मुकाबला काफी करीबी रहा।

वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन की ओर से इमरान मसूद और बीजेपी-आरएलडी गठबंधन की ओर से राघव लखनपाल शर्मा मैदान में थे। इस चुनाव में बीजेपी गठबंधन की बढ़त 21 हजार से ज्यादा वोट रही।

ऐसे में SIR के बाद मतदाताओं की संख्या में आई कमी और बदले हुए चुनावी आंकड़े आने वाले चुनाव में देवबंद के राजनीतिक समीकरण पर कितना असर डालेंगे, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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