इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप के पास शनिवार सुबह आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। भूकंप के झटकों से कई इमारतें और मकान क्षतिग्रस्त हुए, कुछ संरचनाएं देखते ही देखते ढह गईं और कई इलाकों में भूस्खलन हुआ। लोगों में अफरा-तफरी मच गई और हजारों लोग अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 20 बताई गई थी, लेकिन बाद में इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने मृतकों की संख्या बढ़कर कम से कम 38 होने की पुष्टि की।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS के अनुसार, भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 5:58 बजे आया। इसका केंद्र फ्लोरेस क्षेत्र में समुद्र के भीतर था और इसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर बताई गई। कम गहराई पर आने वाले भूकंप अक्सर सतह पर ज्यादा तेज झटके पैदा कर सकते हैं, जिसके कारण इस घटना में कई इलाकों में भारी नुकसान देखने को मिला।
भूकंप के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में हालात की भयावह तस्वीर दिखाई दी। कुछ वीडियो में इमारतों के हिस्से गिरते नजर आए, जबकि आसपास मौजूद लोग जान बचाने के लिए तेजी से भागते दिखाई दिए। कई जगहों पर लोग खुले मैदानों और सड़कों पर जमा हो गए, क्योंकि उन्हें डर था कि आफ्टरशॉक्स के कारण कमजोर हो चुकी इमारतें फिर से गिर सकती हैं।
पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत के कई हिस्से प्रभावित हुए। माउमेरे और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में इमारतों को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई। अधिकारियों के अनुसार, कई लोग मलबे में फंसे हुए थे और बचाव दल लगातार उनकी तलाश कर रहे थे। लगभग 2,000 लोगों ने प्रभावित इलाकों से सुरक्षित स्थानों की ओर निकासी की।
भूकंप के कारण सिर्फ इमारतें ही नहीं गिरीं, बल्कि कई इलाकों में भूस्खलन भी हुआ। चट्टानों और मिट्टी के खिसकने से सड़कें बंद हो गईं और राहत एवं बचाव दलों के लिए प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल हो गया। ट्रांस-फ्लोरेस हाईवे के कुछ हिस्सों के बाधित होने से भी बचाव अभियान की रफ्तार प्रभावित हुई।
इस आपदा के दौरान सबसे बड़ी चिंता तटीय इलाकों को लेकर थी। समुद्र के भीतर भूकंप आने के कारण अधिकारियों ने कुछ समय के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को कहा गया। बाद में चेतावनी हटा दी गई, क्योंकि समुद्र के स्तर में ऐसा कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया जिससे गंभीर सुनामी का खतरा बना रहे। कुछ क्षेत्रों में एक मीटर से कम ऊंची लहरें दर्ज की गईं।
फ्लोरेस के लोगों के लिए सुनामी की चेतावनी विशेष रूप से गंभीर थी, क्योंकि इस क्षेत्र का इतिहास बड़े भूकंप और सुनामी से जुड़ा रहा है। 1992 में फ्लोरेस के पास आए शक्तिशाली भूकंप के बाद विनाशकारी सुनामी आई थी, जिसमें हजारों लोगों की जान चली गई थी। इसलिए शनिवार को सुनामी चेतावनी जारी होते ही स्थानीय लोगों ने तेजी से सुरक्षित स्थानों की ओर जाना शुरू कर दिया।
भूकंप के बाद कई मजबूत आफ्टरशॉक्स भी महसूस किए गए। लगातार झटकों ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी। अधिकारियों ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों में वापस नहीं जाने की अपील की, क्योंकि आफ्टरशॉक्स के दौरान पहले से कमजोर संरचनाएं अचानक गिर सकती हैं।
राहत और बचाव अभियान में कई एजेंसियां जुटी हुई हैं। बचावकर्मी मलबे के बीच फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है, वहां हेलीकॉप्टर और अन्य साधनों की मदद लेने की तैयारी की गई है। अधिकारियों ने बताया कि कुछ स्थानों पर संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण नुकसान और हताहतों की पूरी जानकारी जुटाने में भी समय लग रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, 38 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल और 11 अन्य मामूली रूप से घायल बताए गए हैं। हालांकि राहत एवं बचाव अभियान अभी जारी है, इसलिए मृतकों और घायलों की संख्या में आगे बदलाव संभव है।
इंडोनेशिया भूकंप के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील देशों में शामिल है। देश प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधि के कारण लगातार भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं। ऐसे में मजबूत भवन निर्माण, समय पर चेतावनी और तेज निकासी व्यवस्था लोगों की जान बचाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
फिलहाल फ्लोरेस में सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को बचाना, घायलों का इलाज करना और विस्थापित परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना है। हजारों लोग अपने घरों से बाहर हैं और कई परिवार यह इंतजार कर रहे हैं कि उन्हें अपने लापता परिजनों के बारे में जानकारी कब मिलेगी।
शनिवार सुबह आया यह भूकंप एक बार फिर दिखाता है कि प्राकृतिक आपदा कितनी तेजी से सामान्य जिंदगी को तबाही में बदल सकती है। इमारतों के ढहने, सड़कों के बंद होने, भूस्खलन और सुनामी की आशंका ने राहत अभियान को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। आने वाले घंटों में जैसे-जैसे बचाव दल दूरदराज के इलाकों तक पहुंचेंगे, नुकसान और जानमाल के नुकसान की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
