4 सितंबर को मनाई जाएगी जन्माष्टमी, जानें पूजा मुहूर्त, रोहिणी नक्षत्र और व्रत पारण का समय

4 सितंबर को मनाई जाएगी जन्माष्टमी, जानें पूजा मुहूर्त, रोहिणी नक्षत्र और व्रत पारण का समय

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नई दिल्ली: भगवान श्रीकृष्ण हिंदू धर्म के सबसे लोकप्रिय और पूजनीय देवताओं में से एक हैं। हर साल भक्त श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का बेसब्री से इंतजार करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान कृष्ण ने देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया था। भक्त इस अवसर पर व्रत रखते हैं और आधी रात को भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं।

2026 में कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस वर्ष श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। जन्माष्टमी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि इसे भक्ति, प्रेम और उल्लास के त्योहार के रूप में भी मनाया जाता है।

जन्माष्टमी 2026 तिथि और अष्टमी तिथि

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर 2026 को सुबह 2:25 बजे शुरू होगी और 5 सितंबर 2026 को सुबह 12:13 बजे समाप्त होगी।

जन्माष्टमी की पूजा मध्यरात्रि में की जाती है, क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात के समय हुआ था।

जन्माष्टमी 2026 निशिता पूजा मुहूर्त

निशिता पूजा का समय:
रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक

यह पूजा 4 सितंबर की रात से 5 सितंबर की मध्यरात्रि के दौरान की जाएगी।

जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का समय

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी में रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व माना जाता है।

  • रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 4 सितंबर 2026, सुबह 12:29 बजे
  • रोहिणी नक्षत्र समाप्त: 4 सितंबर 2026, दोपहर 11:04 बजे

कृष्ण जन्माष्टमी 2026 व्रत पारण का समय

जन्माष्टमी के व्रत को अगले दिन पारण करके समाप्त किया जाता है। पारण के समय को लेकर अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं।

धर्मशास्त्र के अनुसार पारण समय:
5 सितंबर को सूर्योदय के बाद सुबह 6:01 बजे

प्रचलित पारण समय:
5 सितंबर की मध्यरात्रि के बाद 12:43 बजे

भक्त अपने क्षेत्र और परंपरा के अनुसार व्रत पारण का समय निर्धारित कर सकते हैं।

जन्माष्टमी व्रत में इन बातों का रखें ध्यान

जन्माष्टमी के व्रत में अन्न का सेवन नहीं करने की धार्मिक परंपरा है। मान्यता के अनुसार इस व्रत के दौरान एकादशी उपवास की तरह कई नियमों का पालन किया जाता है।

व्रत रखने वाले भक्त भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं और मध्यरात्रि में उनके जन्म के बाद व्रत का पारण करते हैं।

आधी रात को होगा श्रीकृष्ण का अभिषेक

जन्माष्टमी की रात 12 बजे के बाद भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति का विशेष अभिषेक किया जाता है। इस दौरान दूध, दही, शहद, घी और जल से भगवान का स्नान कराया जाता है।

अभिषेक के दौरान शंख और घंटियां बजाई जाती हैं तथा वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग अर्पित करने और उन्हें झूला झुलाने की परंपरा है।

इस दौरान भक्त भगवान कृष्ण के मंत्रों का जाप करते हुए जन्मोत्सव मनाते हैं।

श्रीकृष्ण मंत्र

ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्॥

धार्मिक मान्यता के अनुसार जन्माष्टमी के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मकता की अनुभूति होती है।

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