‘वंदे मातरम्’ पर सोनिया गांधी को लेकर विवाद, कांग्रेस ने दी सफाई; बीजेपी के आरोपों से गरमाई सियासत

‘वंदे मातरम्’ पर सोनिया गांधी को लेकर विवाद, कांग्रेस ने दी सफाई; बीजेपी के आरोपों से गरमाई सियासत

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स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को गीत के दौरान कुछ इशारे करते हुए देखा गया। बीजेपी नेताओं ने इन इशारों को ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण संस्करण को रोकने की कोशिश के तौर पर पेश किया। हालांकि, कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सोनिया गांधी गीत को रोकने के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय से खड़े खरगे के लिए कुर्सी की व्यवस्था कराने का इशारा कर रही थीं।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब 2026 में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर देशभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी इस गीत को खास महत्व दिया गया। लाल किले पर पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का पूरा छह अंतरों वाला संस्करण प्रस्तुत किया गया। इसके कारण इस राष्ट्रीय गीत को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा पहले से ही काफी तेज थी।

कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ‘वंदे मातरम्’ के पूरे संस्करण को लेकर असहज था। बीजेपी की ओर से सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए कांग्रेस नेतृत्व के रवैये पर सवाल उठाए गए।

बीजेपी नेताओं का दावा था कि वीडियो में दिखाई दे रहे इशारे महज सामान्य गतिविधि नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी और अन्य नेताओं ने गीत को रोकने का संकेत दिया। बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने इस घटना को राष्ट्रीय गीत के प्रति कथित अनादर से जोड़ते हुए कांग्रेस से सवाल किया। पार्टी के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस से स्पष्टीकरण और कुछ मामलों में माफी की मांग की।

लेकिन कांग्रेस ने पूरे आरोप को सिरे से खारिज कर दिया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ को रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई थी और कार्यक्रम में गीत का पूरा संस्करण प्रस्तुत किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोनिया गांधी का इशारा खरगे के लिए कुर्सी की व्यवस्था कराने को लेकर था, क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष काफी देर से खड़े थे।

यही इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक ही वीडियो को लेकर बीजेपी और कांग्रेस की व्याख्या बिल्कुल अलग है। बीजेपी का कहना है कि वीडियो में गीत के दौरान रोकने का संकेत दिखाई देता है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि वीडियो में दिख रही गतिविधि का संबंध गीत से नहीं बल्कि कार्यक्रम की व्यवस्था से था।

ऐसे मामलों में वीडियो के संदर्भ को समझना बेहद जरूरी हो जाता है। किसी छोटे वीडियो क्लिप में किसी व्यक्ति का इशारा दिखाई दे सकता है, लेकिन उस इशारे के पीछे की पूरी बातचीत या परिस्थिति हमेशा दिखाई नहीं देती। इसलिए केवल कुछ सेकंड के फुटेज के आधार पर किसी व्यक्ति की मंशा तय करना मुश्किल हो सकता है।

इस विवाद की संवेदनशीलता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि ‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय गीत है। इसके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसके सम्मान और प्रस्तुति को लेकर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं अक्सर तीखी रही हैं।

2026 में संसद द्वारा राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून में बदलाव के बाद ‘वंदे मातरम्’ को लेकर चर्चा और बढ़ी है। रिपोर्टों के अनुसार नए कानून में राष्ट्रीय गीत के अपमान या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने के लिए दंड का प्रावधान किया गया है।

यही वजह है कि स्वतंत्रता दिवस पर सामने आए इस वीडियो को बीजेपी ने राजनीतिक मुद्दा बना दिया। पार्टी का तर्क है कि राष्ट्रीय गीत के दौरान किसी भी तरह का कथित हस्तक्षेप गंभीर विषय है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि राजनीतिक विरोध के लिए एक सामान्य इशारे को गलत अर्थ दिया जा रहा है।

कांग्रेस ने यह भी याद दिलाया कि पार्टी के इतिहास में ‘वंदे मातरम्’ का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। जयराम रमेश ने 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, मौलाना आजाद, जवाहरलाल नेहरू और अन्य नेताओं की मौजूदगी में गीत के शुरुआती अंतरों के इस्तेमाल पर निर्णय लिया गया था।

इसलिए कांग्रेस का दावा है कि पार्टी को ‘वंदे मातरम्’ के विरोधी के रूप में पेश करना ऐतिहासिक रूप से भी गलत है। दूसरी ओर, बीजेपी इस वीडियो को कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक सोच पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर रही है।

सोशल मीडिया ने इस विवाद को और बड़ा बना दिया। वीडियो तेजी से वायरल हुआ और अलग-अलग राजनीतिक समर्थकों ने उसे अपने-अपने नजरिए से साझा किया। एक पक्ष ने इसे राष्ट्रीय गीत के अपमान के रूप में देखा, जबकि दूसरे पक्ष ने कांग्रेस की सफाई को सही बताया।

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है—वीडियो में इशारा दिखाई देना एक तथ्य है, लेकिन उस इशारे का उद्देश्य क्या था, यह अलग सवाल है। बीजेपी ने इसे गीत रोकने की कोशिश बताया है, जबकि कांग्रेस ने कुर्सी की व्यवस्था से जुड़ा इशारा बताया है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।

इस विवाद का असर आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक बहसों पर भी दिखाई दे सकता है। बीजेपी इसे कांग्रेस की राष्ट्रवादी छवि पर हमला करने के लिए इस्तेमाल कर सकती है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित विवाद बताकर खारिज कर सकती है।

कुल मिलाकर, सोनिया गांधी और ‘वंदे मातरम्’ को लेकर विवाद अभी आरोप और जवाबी सफाई के स्तर पर है। बीजेपी ने वीडियो के आधार पर सवाल उठाए हैं, जबकि कांग्रेस ने साफ कहा है कि गीत रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई और सोनिया गांधी खरगे के लिए कुर्सी मांग रही थीं। इसलिए इस पूरे मामले को फिलहाल एक राजनीतिक विवाद के रूप में देखना ज्यादा उचित है, न कि किसी स्थापित तथ्य के रूप में।

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अंजली सिंह

अंजली सिंह उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद की एक भारतीय पत्रकार हैं। वे नई दिल्ली में रहती हैं।

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