नई दिल्ली: दिल्ली कांग्रेस प्रभारी काजी निजामुद्दीन ने चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें चुनाव आयोग की ओर से एक नोटिस मिला है, जिसमें उनकी और उनके माता-पिता की उम्र के बीच 15 साल से कम अंतर होने का जिक्र किया गया है।
निजामुद्दीन ने नोटिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पास वर्ष 2003 की चुनाव आयोग की मतदाता सूची में दर्ज उम्र से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। उनका कहना है कि जब पुराने रिकॉर्ड में उनकी और उनके माता-पिता की उम्र स्पष्ट रूप से दर्ज है, तो अब इस आधार पर नोटिस क्यों जारी किया गया?
2003 की वोटर लिस्ट का दिया हवाला
काजी निजामुद्दीन के मुताबिक, वर्ष 2003 की चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट में उनके पिता की उम्र 63 साल, मां की उम्र 50 साल और उनकी अपनी उम्र 27 साल दर्ज है। उन्होंने कहा कि ये रिकॉर्ड चुनाव आयोग से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज हैं।
उन्होंने सवाल किया कि जब चुनाव आयोग के पुराने रिकॉर्ड में उम्र से संबंधित जानकारी पहले से मौजूद है, तो SIR प्रक्रिया के तहत उम्र के अंतर को लेकर नोटिस जारी करने का आधार क्या है।
SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल
दिल्ली कांग्रेस प्रभारी ने कहा कि इस मामले से SIR की प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से स्पष्ट करने की मांग की कि SIR के तहत लोगों को नोटिस जारी करने के लिए क्या मानदंड तय किए गए हैं और पुराने रिकॉर्ड की जांच किस प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
निजामुद्दीन ने आयोग से यह भी पूछा कि लोगों के दस्तावेजों और पुराने मतदाता रिकॉर्ड का सत्यापन किस आधार पर किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग इस पूरी प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट करे।
प्रकाश राज भी उठा चुके हैं SIR पर सवाल
इससे पहले अभिनेता प्रकाश राज ने भी SIR प्रक्रिया को लेकर दावा किया था। उन्होंने कहा था कि बेंगलुरु निर्वाचन क्षेत्र में उनका वोटिंग राइट डिलीट कर दिया गया है और SIR प्रक्रिया के बाद उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया।
प्रकाश राज ने कहा था कि उनका जन्म बेंगलुरु में हुआ, उन्होंने वहीं पढ़ाई की और अपने थिएटर करियर की शुरुआत भी इसी शहर से की। ऐसे में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर उन्होंने सवाल उठाए थे।
प्रकाश राज ने अपने वोटिंग राइट हटाए जाने के दावे पर तंज कसते हुए इसे ‘अच्छा जोक’ बताया था। उन्होंने SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर स्पष्टता की मांग की थी।
