गैस की भारी कमी से बेहाल बांग्लादेश, बंद हो रहीं फैक्ट्रियां और CNG स्टेशन

गैस की भारी कमी से बेहाल बांग्लादेश, बंद हो रहीं फैक्ट्रियां और CNG स्टेशन

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ढाका: बांग्लादेश इस समय गंभीर प्राकृतिक गैस और ऊर्जा संकट से गुजर रहा है। गैस की कमी का असर देश के उद्योग, बिजली उत्पादन, परिवहन और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई दे रहा है। कई फैक्ट्रियों में उत्पादन घट गया है, कुछ उद्योग बंद होने की कगार पर हैं और कई इलाकों में बिजली कटौती की समस्या बढ़ गई है। वहीं, ईंधन की कमी को लेकर विरोध-प्रदर्शन भी सामने आ रहे हैं।

मांग 4 हजार MMcfd तक, सप्लाई सिर्फ 2100-2400 MMcfd

रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में इस समय प्राकृतिक गैस की दैनिक मांग करीब 3800-4000 मिलियन क्यूबिक फीट (MMcfd) है, जबकि उपलब्धता सिर्फ 2100-2400 MMcfd के आसपास रह गई है।

यानी देश में गैस की मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है। गैस प्रेशर की कमी का सीधा असर उद्योगों और बिजली उत्पादन पर पड़ रहा है।

कपड़ा उद्योग पर पड़ा बड़ा असर

बांग्लादेश दुनिया के प्रमुख कपड़ा निर्यातकों में शामिल है और देश की करीब 80 फीसदी विदेशी कमाई कपड़ा क्षेत्र से जुड़ी बताई जाती है।

गैस प्रेशर की कमी के कारण सैकड़ों कपड़ा और कताई मिलों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। कई इकाइयों में उत्पादन घटकर करीब आधा रह गया है, जबकि कुछ फैक्ट्रियों के बंद होने का खतरा भी पैदा हो गया है।

ऊर्जा संकट ऐसे समय में आया है जब कपड़ा उद्योग बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

गैस की कमी से यूरिया फैक्ट्रियां भी प्रभावित

गैस संकट का असर बांग्लादेश के उर्वरक उद्योग पर भी पड़ा है। देश के छह बड़े यूरिया उर्वरक संयंत्रों में से कई गैस की पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिलने के कारण बंद हैं।

इनमें आशुगंज फर्टिलाइजर फैक्ट्री भी शामिल है, जो मार्च 2025 से बंद बताई जा रही है। कभी इस सरकारी फैक्ट्री में मशीनें लगातार चलती थीं और प्राकृतिक गैस की मदद से यूरिया का उत्पादन किया जाता था।

यह संयंत्र कभी 1200 से अधिक लोगों को रोजगार देता था, लेकिन गैस संकट के कारण अब इसके संचालन पर गंभीर असर पड़ा है। यूरिया उत्पादन प्रभावित होने का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ सकता है।

CNG संकट से परिवहन व्यवस्था चरमराई

बांग्लादेश में सार्वजनिक परिवहन का बड़ा हिस्सा CNG पर निर्भर है। ऑटो, बस और टैक्सियों के अलावा बड़ी संख्या में दूसरे वाहन भी CNG का इस्तेमाल करते हैं।

नारायणगंज से लेकर ढाका जैसे बड़े शहरों में बड़ी संख्या में CNG स्टेशन बंद होने की खबरें हैं। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक कई इलाकों में 90 फीसदी से अधिक CNG स्टेशन बंद हो चुके हैं।

इसका असर सीधे वाहन चालकों और आम यात्रियों पर पड़ा है। कई जगह ऑटो चालक विरोध-प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। वहीं, वाहनों की कमी के कारण लोगों को ऑफिस, स्कूल और दूसरे जरूरी कामों के लिए आने-जाने में परेशानी हो रही है।

शहरी इलाकों में भी पारंपरिक चूल्हों का सहारा

ऊर्जा संकट का असर सिर्फ उद्योग और परिवहन तक सीमित नहीं है। गैस की कमी के कारण शहरी इलाकों में भी कई परिवारों को खाना पकाने के लिए लकड़ी और कोयले के पारंपरिक चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है।

इससे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने के साथ-साथ वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

बिजली संकट ने बढ़ाई मुश्किल

प्राकृतिक गैस की कमी का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ रहा है। गैस आधारित बिजली संयंत्रों को पर्याप्त ईंधन नहीं मिलने से देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर बिजली कटौती की समस्या सामने आ रही है।

इस तरह गैस की कमी ने बांग्लादेश में उद्योग, कृषि, परिवहन, बिजली और घरेलू जरूरतों को एक साथ प्रभावित किया है। अगर गैस की उपलब्धता और मांग के बीच का अंतर जल्द कम नहीं हुआ तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर और गहरा पड़ सकता है।

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