जन्माष्टमी पर कान्हा का लकड़ी का झूला पंचक में पहुंच जाए तो क्या करें? जानें खरीदारी से इस्तेमाल तक के नियम

जन्माष्टमी पर कान्हा का लकड़ी का झूला पंचक में पहुंच जाए तो क्या करें? जानें खरीदारी से इस्तेमाल तक के नियम

नई दिल्ली: जन्माष्टमी के त्योहार को लेकर घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। लड्डू गोपाल के लिए नई पोशाक, मुकुट, बांसुरी और झूले की खरीदारी की जा रही है। इसी बीच पंचक को लेकर कई लोगों के मन में सवाल है कि अगर जन्माष्टमी के लिए मंगाया गया लकड़ी का झूला पंचक के दौरान घर पहुंच जाए तो क्या करना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक करीब पांच दिनों की वह अवधि है, जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम भाग के बाद शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र से गुजरता है। इस दौरान कुछ विशेष कार्यों को लेकर सावधानी बरतने की परंपरा है।

क्या पंचक में कान्हा का लकड़ी का झूला खरीद सकते हैं?

पंचक में लकड़ी से जुड़े कुछ कार्यों को लेकर धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। खास तौर पर बड़ी मात्रा में लकड़ी जमा करने, निर्माण शुरू करने और मनुष्य के सोने के लिए नई शय्या तैयार करने से बचने की बात कही जाती है।

हालांकि, पूजा के लिए इस्तेमाल होने वाला छोटा लकड़ी का झूला सामान्य फर्नीचर या लकड़ी के भंडारण से अलग है। इसलिए अगर जन्माष्टमी के लिए झूला पंचक के दौरान खरीदना जरूरी हो जाए तो इसे लेकर अत्यधिक भय या चिंता करने की जरूरत नहीं है।

अगर परिवार में पंचक के दौरान लकड़ी की वस्तु खरीदने की परंपरा नहीं है और खरीदारी टाली जा सकती है, तो पंचक समाप्त होने के बाद झूला खरीदना बेहतर विकल्प माना जा सकता है।

पंचक में ऑनलाइन ऑर्डर किया झूला पहुंच जाए तो क्या करें?

आजकल पूजा की ज्यादातर सामग्री ऑनलाइन भी मंगाई जाती है। ऐसे में संभव है कि झूले का ऑर्डर और भुगतान पंचक शुरू होने से पहले किया गया हो, लेकिन उसकी डिलीवरी पंचक के दौरान हो।

ऐसी स्थिति में झूले की डिलीवरी लेने से मना करना जरूरी नहीं है। इसे घर में सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकता है। अगर मन में किसी तरह का संकोच हो तो पंचक समाप्त होने तक झूले को पैक करके भी रखा जा सकता है।

इसके बाद पूजा स्थान की सफाई करके झूले को गंगाजल से शुद्ध करें। उस पर साफ पीला या लाल कपड़ा बिछाकर लड्डू गोपाल को विराजमान किया जा सकता है।

पहले से घर में मौजूद झूले की सजावट कर सकते हैं?

अगर कान्हा का झूला पहले से घर में मौजूद है और केवल उसकी सफाई या सजावट करनी है, तो इसे नई लकड़ी खरीदने या नया निर्माण शुरू करने जैसा नहीं माना जाता।

ऐसे में झूले की सफाई करना, कपड़ा बदलना, फूलों से सजाना या छोटी-मोटी मरम्मत कराना सामान्य जन्माष्टमी की तैयारी का हिस्सा हो सकता है।

बढ़ई से नया लकड़ी का झूला बनवाना हो तो?

तैयार झूला खरीदने और कच्ची लकड़ी से नया झूला बनवाने में अंतर है। अगर बढ़ई से बिल्कुल नया झूला बनवाने का काम शुरू करना है और इसे कुछ समय के लिए टाला जा सकता है, तो पंचक समाप्त होने के बाद काम शुरू करवाना बेहतर रहेगा।

वहीं अगर झूला बनाने का काम पहले ही शुरू हो चुका है तो उसे बीच में रोकने की जरूरत नहीं मानी जाती। धार्मिक मान्यताओं में नए काम की शुरुआत और पहले से चल रहे काम को पूरा करने के बीच अंतर किया जाता है।

क्या धातु या प्लास्टिक के झूले पर भी पंचक का नियम लागू होता है?

लकड़ी से जुड़ी पारंपरिक मान्यताएं धातु, पीतल, चांदी या प्लास्टिक के छोटे पूजा-झूले पर उसी तरह लागू नहीं होतीं। इसलिए जन्माष्टमी के लिए इन सामग्रियों से बना झूला खरीदने को लेकर लकड़ी जैसी चिंता नहीं होती।हालांकि, झूला खरीदते समय उसकी मजबूती और सुरक्षा का ध्यान जरूर रखें। झूले का आकार लड्डू गोपाल की प्रतिमा के अनुसार होना चाहिए और उसमें कोई नुकीला या असुरक्षित हिस्सा नहीं होना चाहिए।

श्रद्धा और परंपरा को दें प्राथमिकता

पंचक को लेकर अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में मान्यताएं अलग हो सकती हैं। इसलिए अगर परिवार में पंचक के दौरान लकड़ी की वस्तु खरीदने से बचने की परंपरा है तो उसका पालन करना मानसिक संतुष्टि के लिए बेहतर हो सकता है।

वहीं, पहले से ऑर्डर किया गया छोटा पूजा-झूला पंचक में घर पहुंच जाए तो उसे लेकर डरने की जरूरत नहीं है। उसे सुरक्षित रखकर बाद में शुद्ध करके पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है।

जन्माष्टमी के अवसर पर सबसे महत्वपूर्ण चीज महंगा या सुंदर झूला नहीं, बल्कि लड्डू गोपाल के प्रति श्रद्धा, स्वच्छता और सेवा का भाव है।

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