लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कथित AI जनरेटेड वीडियो को लेकर समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो को लेकर बीजेपी ने कड़ी नाराजगी जताई है और इसे सनातन धर्म का अपमान बताया है।
बीजेपी व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष विनीत शारदा ने वीडियो को लेकर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस तरह का वीडियो बनाए जाने को बेहद आपत्तिजनक बताया।
‘सपा की नीच हरकत’, BJP नेता का हमला
विनीत शारदा ने AI वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे समाजवादी पार्टी की ‘नीच हरकत’ बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति से साफ जाहिर होता है कि सपा किस स्तर तक गिर चुकी है।
बीजेपी नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किसी एक पार्टी के नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने योगी आदित्यनाथ को सनातन धर्म का प्रतीक बताते हुए कहा कि इस तरह का वीडियो बनाना बेहद आपत्तिजनक है।
अखिलेश यादव से माफी की मांग
बीजेपी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से इस मामले में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। साथ ही पार्टी ने वीडियो को समाजवादी पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल से तत्काल हटाने की मांग भी की है।
चुनाव से पहले सोशल मीडिया पर बढ़ा घमासान
दरअसल, उत्तर प्रदेश में आगामी चुनाव को देखते हुए समाजवादी पार्टी और बीजेपी के बीच सोशल मीडिया पर भी सियासी वार-पलटवार तेज हो गया है। बीजेपी की ओर से पहले अखिलेश यादव का AI वीडियो जारी कर सपा सरकार के कार्यकाल को लेकर निशाना साधा गया था।
इसके जवाब में समाजवादी पार्टी की ओर से भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर केंद्रित एक AI वीडियो जारी किया गया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस वीडियो को दिखाया।
वीडियो में योगी के भगवा कपड़ों को लेकर विवाद
सपा की ओर से जारी बताए जा रहे वीडियो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भगवा वस्त्रों में चिलम पीते हुए दिखाया गया है। वीडियो के जरिए सपा ने राम मंदिर चंदा, स्कूल बंद किए जाने, बेरोजगारी और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए हैं।
बीजेपी ने इस वीडियो को लेकर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे सनातन धर्म का अपमान बताया है। इस मामले के बाद दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच सोशल मीडिया पर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
