दिल्ली में प्रदूषण का कहर! AQI 324 पहुंचते ही GRAP-II लागू, सख्त पाबंदियों से बढ़ेगी निगरानी

दिल्ली में प्रदूषण का कहर! AQI 324 पहुंचते ही GRAP-II लागू, सख्त पाबंदियों से बढ़ेगी निगरानी

दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण ने एक बार फिर गंभीर रूप लेना शुरू कर दिया है। राजधानी की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है और सोमवार, 2 नवंबर को एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 324 दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली की हवा ‘बेहद खराब’ (Very Poor) श्रेणी में पहुंच गई। बिगड़ते हालात को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी GRAP-II को लागू कर दिया है।

इस फैसले के बाद दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कई अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन को सड़कों पर धूल कम करने, वाहनों से निकलने वाले धुएं पर रोक लगाने और निर्माण स्थलों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

बारिश के बाद फिर बिगड़ी दिल्ली की हवा

अक्टूबर के आखिरी दिनों में बारिश के कारण दिल्ली की हवा में कुछ सुधार देखने को मिला था। 30 अक्टूबर को राजधानी का AQI लगभग 60 तक पहुंच गया था, जिससे लोगों को प्रदूषण से थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन यह राहत ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी।

31 अक्टूबर को AQI बढ़कर 117 हो गया, जबकि 1 नवंबर को यह 261 तक पहुंच गया। इसके बाद 2 नवंबर को शाम 4 बजे तक AQI 324 दर्ज किया गया। लगातार बढ़ते प्रदूषण ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर काफी अधिक दर्ज किया गया। जहांगीरपुरी जैसे इलाकों में AQI 417 तक पहुंच गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है।

GRAP-II लागू होने के बाद क्या-क्या बदलेगा?

GRAP-II लागू होने के बाद दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों को और सख्ती से लागू किया जाएगा।

इसके तहत प्रमुख सड़कों पर मैकेनिकल स्वीपिंग बढ़ाई जाएगी। सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जाएगा और धूल को नियंत्रित करने के लिए एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जाएगा।

निर्माण स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। निर्माण सामग्री को खुले में रखने और धूल फैलाने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई की जाएगी। कूड़ा, पत्तियां और अन्य कचरा खुले में जलाने वालों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।

इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस को प्रमुख चौराहों और व्यस्त सड़कों पर ट्रैफिक जाम कम करने के निर्देश दिए गए हैं।

वाहनों से निकलने वाले धुएं पर रहेगी नजर

दिल्ली में वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण कारण है। GRAP-II के तहत प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी।

वाहन चालकों को वैध PUC (Pollution Under Control) सर्टिफिकेट रखने की सलाह दी गई है। बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र के चलने वाले वाहनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

प्रशासन ने लोगों से निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने और मेट्रो, बस तथा अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का अधिक उपयोग करने की अपील की है। कार पूलिंग को भी बढ़ावा देने की बात कही गई है।

बच्चों और बुजुर्गों की बढ़ी चिंता

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस से जुड़ी बीमारियों से परेशान लोगों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बेहद खराब हवा में लंबे समय तक रहने से आंखों में जलन, गले में परेशानी, खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। अस्थमा और हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

लोगों को सलाह दी जा रही है कि प्रदूषण अधिक होने के दौरान अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें। सुबह और शाम के समय खुले में भारी व्यायाम करने से बचें और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

सरकार की तैयारियों की होगी असली परीक्षा

दिल्ली सरकार ने सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के लिए पहले से कई कदम उठाए हैं। इनमें वाहनों से जुड़े प्रतिबंध, निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण, पार्किंग शुल्क में बढ़ोतरी और सरकारी तथा निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति जैसे उपाय शामिल हैं।

अब GRAP-II लागू होने के बाद संबंधित विभागों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। केवल आदेश जारी करने से प्रदूषण पर नियंत्रण संभव नहीं होगा, बल्कि नियमों का जमीन पर पालन कराना भी जरूरी होगा।

दिल्ली का प्रदूषण केवल राजधानी तक सीमित समस्या नहीं है। NCR के दूसरे शहरों और पड़ोसी राज्यों से आने वाला प्रदूषण भी यहां की हवा को प्रभावित करता है। इसलिए इस समस्या से निपटने के लिए दिल्ली के साथ-साथ आसपास के राज्यों को भी मिलकर काम करना होगा।

फिलहाल दिल्लीवासियों को प्रदूषण से राहत मिलने का इंतजार है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और AQI के आंकड़ों के आधार पर प्रशासन आगे के फैसले ले सकता है। अगर हवा की गुणवत्ता और बिगड़ती है, तो GRAP के अगले चरणों के तहत और सख्त पाबंदियां लागू की जा सकती हैं।

दिल्ली के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यही है कि प्रदूषण को गंभीर स्तर तक पहुंचने से कैसे रोका जाए और राजधानी के करोड़ों लोगों को साफ हवा में सांस लेने का मौका कैसे दिया जाए।

author

अंजली सिंह

अंजली सिंह उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद की एक भारतीय पत्रकार हैं। वे नई दिल्ली में रहती हैं।

संबंधित पोस्ट