Miss World 2026: उज्जैन से ग्लोबल मंच तक पहुंचीं निकिता पोरवाल, आपका पिन कोड आपकी क्षमता तय नहीं कर सकता

Miss World 2026: उज्जैन से ग्लोबल मंच तक पहुंचीं निकिता पोरवाल, आपका पिन कोड आपकी क्षमता तय नहीं कर सकता

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मुंबई: मध्य प्रदेश के उज्जैन से निकलकर मिस वर्ल्ड के 75वें मंच तक पहुंचीं निकिता पोरवाल इन दिनों वियतनाम में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। 140 से अधिक देशों के प्रतिभागियों के बीच भारत की संस्कृति, आधुनिक सोच और अपनी व्यक्तिगत यात्रा को दुनिया के सामने रखने की जिम्मेदारी निभा रहीं निकिता ने मिस वर्ल्ड की तैयारियों, फिटनेस, मानसिक स्वास्थ्य, थिएटर और अपने सामाजिक प्रोजेक्ट ‘माटी’ को लेकर खुलकर बात की।

निकिता का कहना है कि मिस वर्ल्ड के मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना सिर्फ एक सैश पहनने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की संस्कृति और सोच को दुनिया के सामने पेश करने का अवसर है।

‘परंपरा और आधुनिकता एक-दूसरे की पूरक हैं’

वियतनाम में ‘ट्रेडिशनल इंडिया’ और ‘न्यू-एज ग्लोबल इंडिया’ के बीच संतुलन बनाने को लेकर निकिता ने कहा कि वह दुनिया को ऐसा भारत दिखाना चाहती हैं, जो अपनी प्राचीन परंपराओं से गहराई से जुड़ा है और साथ ही प्रगति को लेकर निडर भी है।

उन्होंने कहा, “मिस वर्ल्ड के मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना सिर्फ एक सैश पहनना नहीं है, बल्कि देश की एक अमर कहानी को दुनिया के सामने लाना है।”

निकिता के मुताबिक भारत में सदियों पुराना ज्ञान और आधुनिक तकनीक साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। उनके लिए भारतीय परंपरा और आधुनिकता एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं, बल्कि एक-दूसरे को पूरा करती हैं।

छोटे शहरों की लड़कियों के लिए निकिता का खास संदेश

उज्जैन से मिस इंडिया और फिर मिस वर्ल्ड के मंच तक के सफर को याद करते हुए निकिता ने छोटे शहरों की लड़कियों को खास संदेश दिया।

उन्होंने कहा, “आपका पिन कोड कभी भी आपकी क्षमताओं को तय नहीं कर सकता।” निकिता ने युवाओं से कहा कि भले ही आज उनके पास हर साधन या अवसर न हो, लेकिन उन्हें खुद को इस तरह तैयार रखना चाहिए कि जब मौका मिले तो वे पूरी तरह तैयार रहें।

उन्होंने कहा कि अपनी सोच को शहर की सीमाओं में नहीं बांधना चाहिए, क्योंकि दुनिया आपके पते से ज्यादा आपके हुनर में दिलचस्पी रखती है।

मिस वर्ल्ड की तैयारी के बीच ऐसे रखती हैं खुद को फिट

मिस वर्ल्ड का बूटकैंप लगातार यात्रा, शूटिंग और इवेंट्स से भरा होता है। इस व्यस्त और थका देने वाले शेड्यूल के बावजूद निकिता फिटनेस से समझौता नहीं करतीं।

अपने डाइट और वर्कआउट रूटीन के बारे में उन्होंने बताया कि उनका फोकस शरीर को सही पोषण देने पर रहता है। वह प्रोटीन, फल, हरी सब्जियां और पर्याप्त पानी लेती हैं।

निकिता के मुताबिक फिट रहने के लिए हर बार जिम जाना जरूरी नहीं है। समय मिलने पर वह होटल के कमरे में करीब 20 मिनट का क्विक वर्कआउट करती हैं, जिसमें बॉडीवेट स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, मोबिलिटी एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग और ब्रीदिंग शामिल हैं।

ओवरथिंकिंग से निपटने के लिए ‘5-मिनट माइंडफुलनेस हैक’

लगातार कैमरों के सामने रहना और हर पल जज किए जाने का दबाव मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। निकिता ने बताया कि ऐसे समय में वह अपने उद्देश्य को याद करती हैं।

उन्होंने कहा कि जब ओवरथिंकिंग या एंग्जायटी हावी होती है, तो वह खुद को याद दिलाती हैं कि उन्होंने यह सफर क्यों शुरू किया था। उनके मुताबिक, दबाव से ध्यान हटाकर अपने उद्देश्य पर केंद्रित करने से मानसिक तनाव कम करने में मदद मिलती है।

थिएटर को बताया जिंदगी का सबसे बड़ा शिक्षक

निकिता पोरवाल का थिएटर से पुराना जुड़ाव रहा है। उन्होंने बताया कि थिएटर ने उन्हें हाई-प्रेशर माहौल में खुद को संभालने और लोगों से जुड़ने की कला सिखाई है।

उन्होंने कहा, “थिएटर मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा शिक्षक रहा है। इसने मुझे सिखाया कि स्टेज खुद को साबित करने की जगह नहीं है, बल्कि लोगों से दिल का रिश्ता जोड़ने का जरिया है।”

निकिता के मुताबिक थिएटर ने उन्हें ध्यान से सुनना और अपनी भावनाओं को ईमानदारी से व्यक्त करना सिखाया। उन्होंने कहा कि मिस वर्ल्ड में भी यह सीख काफी काम आ रही है, क्योंकि लोग आपकी बातें भूल सकते हैं, लेकिन यह नहीं भूलते कि आपने उन्हें कैसा महसूस कराया।

‘ब्यूटी विद अ पर्पस’ में ‘माटी’ प्रोजेक्ट

मिस वर्ल्ड के सबसे महत्वपूर्ण ‘ब्यूटी विद अ पर्पस’ (BWAP) राउंड के लिए निकिता का प्रोजेक्ट ‘माटी’ आदिवासी महिलाओं और बच्चों के सशक्तीकरण पर केंद्रित है।

निकिता का कहना है कि आदिवासी समुदाय ने भारत की संस्कृति और जंगलों को लंबे समय से संरक्षित किया है। वह दुनिया के सामने आदिवासी समाज की गरिमा और उनके संघर्ष को लाना चाहती हैं।

उन्होंने कहा, “‘माटी’ का मकसद उनके लिए बोलना नहीं, बल्कि दुनिया को उनकी बात सुनने के लिए मजबूर करना है।”

निकिता के मुताबिक आदिवासी समुदाय किसी की दया या मदद का इंतजार नहीं कर रहा, बल्कि बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान का हकदार है।

8 साल की उम्र में लिखी थी पहली किताब

निकिता पोरवाल ने महज 8 साल की उम्र में अपनी पहली किताब लिखी थी। इसके बाद उन्होंने राइटिंग, म्यूजिक, थिएटर, फैशन और सिनेमा जैसे कई क्षेत्रों में रुचि और पहचान बनाई।

निकिता इन सभी कलाओं को कहानी कहने के अलग-अलग माध्यम मानती हैं। उन्होंने कहा कि ये गतिविधियां उन्हें भटकाती नहीं, बल्कि मानसिक रूप से संतुलित रखने में मदद करती हैं।

हालांकि, अगर उन्हें इनमें से किसी एक को चुनना हो तो वह थिएटर को अपना सबसे बड़ा स्ट्रेस बस्टर मानती हैं। उनके मुताबिक मंच पर कदम रखते ही उन्हें दुनिया की बाकी उलझनों से दूर शांति महसूस होती है।

भारत की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व कर रहीं निकिता

उज्जैन से शुरू हुआ निकिता पोरवाल का सफर अब मिस वर्ल्ड के वैश्विक मंच तक पहुंच चुका है। वह सिर्फ भारत का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहीं, बल्कि छोटे शहरों से आने वाले युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।

फिटनेस, कला, सामाजिक सरोकार और भारतीय संस्कृति को साथ लेकर चल रही निकिता अब वियतनाम में मिस वर्ल्ड के मंच पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं। देशभर के फैंस की नजरें उनके प्रदर्शन पर टिकी हैं।

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