नई दिल्ली: संसद के 20 जुलाई से शुरू होने वाले मॉनसून सत्र से पहले परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर तमिलनाडु की राजनीति तेज हो गई है। डीएमके (DMK) और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने इस मुद्दे पर एकजुट होकर केंद्र सरकार के संभावित परिसीमन बिल का विरोध करने का ऐलान किया है।
डीएमके के प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने कहा कि यदि केंद्र सरकार ऐसा कोई कानून लाती है, जो राज्यों के अधिकारों या संविधान के खिलाफ होगा, तो पार्टी उसका कड़ा विरोध करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम फैसला बिल का पूरा मसौदा सामने आने के बाद लिया जाएगा।
इससे पहले एमके स्टालिन ने पार्टी सांसदों की बैठक में निर्देश दिए कि वे संसद में तमिलनाडु के हितों की रक्षा करें और राज्य के अधिकारों को प्रभावित करने वाले किसी भी प्रस्ताव का विरोध करें।
वहीं, मुख्यमंत्री विजय ने भी परिसीमन को लेकर अपना रुख दोहराते हुए कहा कि तमिलनाडु अपने प्रतिनिधित्व से कोई समझौता नहीं करेगा और राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएगा।
दूसरी ओर, बीजेपी ने परिसीमन का समर्थन किया है। पार्टी प्रवक्ता नारायणन तिरुपति का कहना है कि परिसीमन की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो जानी चाहिए थी। हालांकि, एआईएडीएमके ने इस पूरे मुद्दे पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
अब सबकी नजर संसद के मॉनसून सत्र पर है, जहां इस मुद्दे पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
