सीकर से शुरू हुआ ‘जनप्रतिनिधियों ने दस्तक’ कैंपेन, किसानों-मजदूरों की मांगों का चार्टर सौंपा

सीकर से शुरू हुआ ‘जनप्रतिनिधियों ने दस्तक’ कैंपेन, किसानों-मजदूरों की मांगों का चार्टर सौंपा

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सीकर: संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर देशव्यापी ‘दस्तक कैंपेन’ की शुरुआत सीकर जिले से हुई। इसके तहत ‘जनप्रतिनिधियों ने दस्तक’ अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान 17 से 25 अगस्त तक चलेगा, जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय व राज्य मंत्री, सांसद और विधायक समेत जनप्रतिनिधियों को किसानों, मजदूरों और आम लोगों की मांगों का चार्टर सौंपा जाएगा।

धोद विधायक को सौंपा मांगों का चार्टर

धोद विधानसभा क्षेत्र की इकाई ने अभियान की प्रतीकात्मक शुरुआत करते हुए सरवड़ी गांव स्थित धोद विधायक गोरधन वर्मा के आवास पर पहुंचकर मांगों का चार्टर सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने विधायक के साथ विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा की।

प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक, विधायक गोरधन वर्मा ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ प्रशासन को पत्र भेजकर मांगों के समाधान के लिए प्रयास करने का आश्वासन दिया।

सड़क, जल निकासी और चारागाह भूमि से जुड़ी मांगें

चार्टर में स्थानीय समस्याओं से जुड़ी कई मांगें शामिल की गई हैं। इनमें नानी, ढाका की ढाणी और भढाढर तिराहे तक सड़क निर्माण, क्षतिग्रस्त सड़कों की तत्काल मरम्मत और अधूरे सड़क मार्गों को मिसिंग लिंक के जरिए जोड़ने की मांग प्रमुख है।

इसके अलावा खेतों और घरों में जमा होने वाले गंदे पानी की निकासी के लिए स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। स्थानीय निकायों और यूआईटी द्वारा दर्ज की गई गांवों की चारागाह भूमि से जुड़े आदेशों को निरस्त करने तथा इन जमीनों पर पीढ़ियों से बसे लोगों की स्थिति यथावत रखने की मांग भी चार्टर में शामिल है।

यूरिया-डीएपी की कालाबाजारी रोकने की मांग

किसान संगठनों ने यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और किसानों को उर्वरकों की पर्याप्त एवं समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाई।

इसके साथ ही किसानों, खेत मजदूरों और श्रमिकों से जुड़ी कई नीतिगत मांगें भी चार्टर में शामिल हैं।

FTA और चार लेबर कोड का विरोध

मांगों में भारत-अमेरिका प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और यूरोपीय देशों के साथ प्रस्तावित FTA का विरोध शामिल है। संगठनों ने बीज से संबंधित प्रस्तावित कानूनों को रद्द करने और चार लेबर कोड वापस लेकर पुरानी श्रम संहिताओं को दोबारा लागू करने की मांग की है।

श्रमिकों के लिए 32,000 रुपये न्यूनतम मासिक मजदूरी तय करने की मांग भी रखी गई है।

किसानों का कर्ज माफ करने और MSP पर कानून की मांग

किसान संगठनों ने किसानों, खेत मजदूरों और श्रमिकों के कर्ज की पूर्ण माफी की मांग की है। साथ ही C2+50% फार्मूले के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने की मांग उठाई गई है।

मनरेगा में बदलाव करते हुए 200 दिनों का रोजगार और प्रतिदिन 700 रुपये मजदूरी देने की मांग भी चार्टर में शामिल है।

इसके अलावा बिजली के निजीकरण को रोकने, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अनाज भंडारों में किसी एक कॉरपोरेट के एकाधिकार को खत्म करने और फसल एवं पशुधन बीमा की व्यापक और आसान व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।

26 नवंबर से बड़े आंदोलन की चेतावनी

अखिल भारतीय किसान सभा के राजस्थान के सक्रिय नेता सत्यजीत भींचर ने कहा कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित FTA भारतीय कृषि, उद्योग और व्यापार के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने इसे खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा से जुड़ा आंदोलन बताया।

उन्होंने कहा कि अभियान को 26 नवंबर से दिल्ली, राज्यों की राजधानियों और जिला-तहसील स्तर पर घेराव एवं बहुदिवसीय आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रमुख मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है।

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