‘धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है’

‘धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है’

न्यूयॉर्क: अमेरिका के न्यूयॉर्क में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने धर्म और मानवता को लेकर अपने विचार साझा किए।

मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है। उन्होंने यह भी कहा कि सत्य एक है और लोगों को धर्मों के बीच मौजूद मूलभूत समानताओं को समझने की जरूरत है।

‘समाज को शिक्षित नहीं करेंगे तो भटकाव आएगा’

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने समाज को शिक्षित करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर हम समाज को शिक्षित नहीं करते हैं तो भटकाव पैदा होता है।

इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा हुआ, जिसके बाद हमारा समाज और हमारा देश विदेशी हमलों का निशाना बना और कई चीजें खो गईं।

ईश्वर तक पहुंचने के लिए रीति-रिवाज और अनुशासन जरूरी

मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में कई धर्म हैं और आज धार्मिक पहचान मुख्य रूप से रीति-रिवाजों और परंपराओं के माध्यम से होती है।

उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक अनुशासन को अपनाने और ईश्वर तक पहुंचने के लिए निर्धारित मार्ग पर चलने के लिए रीति-रिवाजों का अनुशासन भी जरूरी है।

भागवत ने अपने संबोधन में अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के सम्मान के साथ मानवता की एकता पर जोर दिया।

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