Vadh 2 मूवी रिव्यू: अपराध, आत्मग्लानि और नैतिक द्वंद्व की सधी हुई कहानी

Vadh 2 मूवी रिव्यू: अपराध, आत्मग्लानि और नैतिक द्वंद्व की सधी हुई कहानी

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Movie Rating: ⭐️⭐️⭐️⭐ Stars (4/5 Stars)

Vadh 2 एक ऐसी फिल्म है जो शोर-शराबे और बड़े ट्विस्ट्स पर नहीं, बल्कि इंसानी मन, अपराधबोध और नैतिक जिम्मेदारी पर भरोसा करती है। निर्देशक जसपाल सिंह संधू की यह फिल्म Vadh (2022) की सीधी सीक्वल नहीं है, बल्कि उसी वैचारिक दुनिया का विस्तार है। संजय मिश्रा और नीना गुप्ता के दमदार अभिनय के कारण यह फिल्म एक गंभीर और संवेदनशील अनुभव बन जाती है।


कहानी और कथानक

फिल्म की कहानी मुख्य रूप से एक जेल के भीतर घटित होती है, जहाँ एक जेल प्रहरी की सामान्य दिनचर्या एक ऐसी घटना से बदल जाती है, जो उसे नैतिक रूप से झकझोर कर रख देती है। एक कैदी से जुड़ा मामला धीरे-धीरे केवल एक अपराध की जाँच न रहकर आत्ममंथन की यात्रा बन जाता है।

वध 2 की कहानी तेज़ रफ्तार नहीं है। यह धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और दर्शक को सोचने का समय देती है। फिल्म सवाल उठाती है—क्या हर अपराध सिर्फ कानून की नज़र में अपराध होता है, या इंसान की अंतरात्मा भी कोई फैसला सुनाती है?


विषयवस्तु और गहराई

इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका नैतिक द्वंद्व है। Vadh 2 दिखाती है कि इंसान कई बार हालात के दबाव में ऐसे फैसले ले लेता है, जिन्हें वह खुद भी पूरी तरह सही नहीं मानता। फिल्म अपराध और अपराधी को सिर्फ काले-सफेद रंगों में नहीं देखती, बल्कि उनके पीछे की परिस्थितियों को समझने की कोशिश करती है।

जेल को यहाँ सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि एक प्रतीक के रूप में दिखाया गया है—जहाँ कैदी ही नहीं, बल्कि जेल कर्मचारी भी अपने-अपने डर, मजबूरियों और सीमाओं में कैद हैं। सत्ता, भ्रष्टाचार और चुप्पी की संस्कृति को फिल्म बहुत सधे हुए तरीके से दर्शाती है।


अभिनय: संजय मिश्रा और नीना गुप्ता का कमाल

संजय मिश्रा का अभिनय इस फिल्म की रीढ़ है। वे बिना ज़्यादा संवाद बोले, सिर्फ चेहरे के भाव और खामोशी से अपने किरदार की बेचैनी और संघर्ष को व्यक्त करते हैं। उनका अभिनय संयमित है, लेकिन गहराई से भरा हुआ।

नीना गुप्ता फिल्म में संवेदनशीलता और मानवीय गर्माहट लेकर आती हैं। उनका किरदार भावनात्मक संतुलन का काम करता है और दर्शकों को कहानी से जोड़ता है। संजय मिश्रा और नीना गुप्ता के बीच की केमिस्ट्री बेहद सहज और वास्तविक लगती है, जो फिल्म को और प्रभावी बनाती है।

सहायक कलाकार भी अपने-अपने किरदारों में विश्वसनीय नज़र आते हैं और जेल के माहौल को सजीव बनाते हैं।


निर्देशन और तकनीकी पक्ष

निर्देशक जसपाल सिंह संधू ने फिल्म को बिना मेलोड्रामा के संभाला है। वे दर्शकों पर भावनाएँ थोपने की बजाय उन्हें महसूस करने का मौका देते हैं। सिनेमैटोग्राफी में अंधेरे, संकरे फ्रेम और ठंडे रंगों का इस्तेमाल जेल के घुटन भरे माहौल को बखूबी दर्शाता है।

एडिटिंग जानबूझकर धीमी रखी गई है, जो कुछ दर्शकों को लंबी लग सकती है, लेकिन फिल्म के गंभीर स्वर के साथ यह तालमेल बिठाती है। बैकग्राउंड म्यूज़िक सीमित है और कई जगह खामोशी ही कहानी कहती है, जो प्रभावशाली साबित होती है।


फिल्म की खूबियाँ और कमियाँ

खूबियाँ:

  • गहरी और सोचने पर मजबूर करने वाली कहानी
  • संजय मिश्रा और नीना गुप्ता का शानदार अभिनय
  • यथार्थवादी निर्देशन
  • नैतिक और सामाजिक मुद्दों की सधी हुई प्रस्तुति

कमियाँ:

  • धीमी गति हर दर्शक को पसंद नहीं आएगी
  • पारंपरिक थ्रिलर जैसा रोमांच कम है
  • कुछ हिस्सों में कहानी अनुमानित लग सकती है

दर्शकों के लिए कैसी है यह फिल्म?

वध 2 उन दर्शकों के लिए है जो मसालेदार मनोरंजन से ज़्यादा अर्थपूर्ण सिनेमा पसंद करते हैं। यह फिल्म दिमाग और दिल दोनों पर असर डालती है। जो लोग तेज़ एक्शन या बड़े ट्विस्ट्स की उम्मीद लेकर जाएंगे, उन्हें यह फिल्म धीमी लग सकती है, लेकिन गंभीर सिनेमा के प्रेमियों के लिए यह एक संतोषजनक अनुभव है।


अंतिम फैसला

Vadh 2 एक शांत, गंभीर और प्रभावशाली फिल्म है जो अपराध को केवल घटना नहीं, बल्कि परिणामों की श्रृंखला के रूप में देखती है। यह फिल्म हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि सही और गलत के बीच की रेखा कितनी धुंधली हो सकती है।

author

जितेन्द्र कुमार

जितेन्द्र कुमार उत्तर प्रदेश के हाथरस के रहने वाले एक भारतीय पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो वरिष्ठ पत्रकार और एक्सपर्ट टाइम्स नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक के रूप में जाने जाते हैं।

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