नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध मॉड्यूल की जांच में बड़ा खुलासा करने का दावा किया है। एसटीएफ के आईजी गौरव शर्मा के अनुसार, पूर्वी बर्धमान से गिरफ्तार संदिग्ध हमीम मंडल पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के लगातार संपर्क में था और दिल्ली के जंतर-मंतर में प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान पुलिस की वर्दी पहनकर हिंसा और तोड़फोड़ फैलाने की साजिश रच रहा था।
एसटीएफ ने इस मामले में हमीम की कथित सहयोगी और गर्लफ्रेंड अर्पिता सरकार को झारखंड के साहिबगंज से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, तकनीकी निगरानी (सर्विलांस) के जरिए उसकी लोकेशन ट्रैक की गई, जिसके बाद उसे पश्चिम बंगाल लाकर पूछताछ की जा रही है।
जांच एजेंसी का कहना है कि हमीम के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से मिले दस्तावेजों के आधार पर यह जानकारी सामने आई कि वह पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क में था। एसटीएफ का आरोप है कि वह युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें अपने नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश भी कर रहा था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में यह भी सामने आया कि हमीम को पाकिस्तान के एक नागरिक हम्माद, जिसे शाहजाद भट्टी गिरोह का सहयोगी बताया जा रहा है, ने पुलिस की वर्दियां खरीदने का निर्देश दिया था। दावा है कि इन वर्दियों को दिल्ली के एक तय बस स्टॉप तक पहुंचाना था, ताकि जंतर-मंतर में प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान उनका इस्तेमाल किया जा सके। हालांकि, एसटीएफ के मुताबिक भुगतान संबंधी दिक्कतों के कारण यह योजना पूरी नहीं हो सकी।
एसटीएफ का यह भी दावा है कि हमीम दिल्ली में ऐसे लोगों की तलाश कर रहा था, जो प्रदर्शन के दौरान पेट्रोल बम फेंक सकें। एजेंसी इस पूरे नेटवर्क और संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है।
जांच में यह भी दावा किया गया है कि स्थानीय मंत्री उमेश राय भी कथित तौर पर आतंकियों के निशाने पर थे। एसटीएफ के अनुसार, हमीम और अर्पिता सरकार पर मंत्री के बेटे को हनी ट्रैप में फंसाने की साजिश रचने का भी आरोप है।
इसके अलावा, शुरुआती जांच में हमीम के सोशल मीडिया के जरिए सीमा पार सक्रिय ऐसे नेटवर्क से जुड़े होने का दावा किया गया है, जिनका संबंध ड्रग्स और हथियारों की तस्करी तथा भारत में आतंकवादी गतिविधियों की फंडिंग से बताया जा रहा है।
फिलहाल, ये सभी दावे पश्चिम बंगाल STF और पुलिस जांच पर आधारित हैं। मामले की जांच जारी है और अंतिम तथ्य अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
