राज्यपाल को छुट्टी कौन देता है? जानिए क्या है संवैधानिक नियम

राज्यपाल को छुट्टी कौन देता है? जानिए क्या है संवैधानिक नियम

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के 17 अगस्त से 26 अगस्त तक अवकाश पर रहने के बाद राज्यपाल के अवकाश से जुड़े संवैधानिक नियमों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राज्यपाल अपने गृह राज्य गुजरात के दौरे पर हैं और इसके लिए उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत औपचारिक अनुमति ली है। ऐसे में सवाल उठता है कि राज्यपाल को छुट्टी कौन देता है और उनकी अनुपस्थिति में राज्य का कामकाज कैसे चलता है?

राष्ट्रपति देते हैं राज्यपाल के अवकाश को मंजूरी

राज्यपाल का पद किसी सामान्य सरकारी कर्मचारी या अधिकारी के पद से अलग होता है। राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति करते हैं। संवैधानिक व्यवस्था के तहत राज्यपाल अपने पद पर राष्ट्रपति की इच्छा तक बने रहते हैं।

इसी वजह से राज्यपाल को अवकाश पर जाने के लिए भारत के राष्ट्रपति से अनुमति लेनी होती है। राज्यपाल अपना अवकाश आवेदन राष्ट्रपति को संबोधित करते हैं, जिसे राजभवन के माध्यम से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति भवन भेजा जाता है। राष्ट्रपति की औपचारिक मंजूरी के बाद ही अवकाश प्रभावी माना जाता है।

राज्यपाल के लिए छुट्टी का तय कोटा नहीं

आम सरकारी कर्मचारियों की तरह राज्यपाल के लिए कैजुअल लीव या अर्न्ड लीव का कोई निश्चित वार्षिक कोटा निर्धारित नहीं होता। राज्यपाल का पद एक संवैधानिक पद है और उनके अवकाश की प्रक्रिया भी इसी आधार पर तय होती है।

जरूरत पड़ने पर राज्यपाल स्वास्थ्य, व्यक्तिगत या पारिवारिक कारणों के अलावा निजी अथवा गैर-आधिकारिक यात्रा के लिए भी अवकाश ले सकते हैं। हालांकि, लंबी अवधि के लिए राज्य से बाहर रहने की स्थिति में निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाता है।

राज्यपाल की गैरमौजूदगी में कौन संभालता है काम?

राज्यपाल के अवकाश पर जाने से राज्य का संवैधानिक कामकाज नहीं रुकता। उनकी अनुपस्थिति में राष्ट्रपति की ओर से व्यवस्था की जाती है कि राज्यपाल के कर्तव्यों का निर्वहन कौन करेगा।

कई मामलों में राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को राज्यपाल के कार्यों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा जा सकता है। इसके अलावा राष्ट्रपति किसी पड़ोसी राज्य के राज्यपाल को भी अस्थायी रूप से अतिरिक्त जिम्मेदारी दे सकते हैं।

अवकाश के दौरान वेतन और सुविधाओं पर क्या असर पड़ता है?

राज्यपाल के अवकाश पर रहने के दौरान उनके संवैधानिक पद से जुड़े वेतन, भत्ते और अन्य निर्धारित सुविधाएं सामान्य तौर पर प्रभावित नहीं होती हैं। पद की गरिमा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राजभवन और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं भी निर्धारित नियमों के अनुसार जारी रहती हैं।

क्यों खास है राज्यपाल का पद?

राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। इसलिए उनकी अनुपस्थिति के दौरान भी संवैधानिक व्यवस्था को निरंतर बनाए रखना जरूरी होता है। यही कारण है कि राज्यपाल के अवकाश से लेकर उनकी अनुपस्थिति में कार्यभार संभालने तक की प्रक्रिया सामान्य सरकारी अवकाश व्यवस्था से अलग होती है।

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