विदेशों में एक ही ब्रांड के प्रोडक्ट पर चेतावनी, भारत में क्यों अलग है पैकेजिंग? जानें पूरा मामल

विदेशों में एक ही ब्रांड के प्रोडक्ट पर चेतावनी, भारत में क्यों अलग है पैकेजिंग? जानें पूरा मामल

एक ही कंपनी और एक ही ब्रांड का प्रोडक्ट भारत और विदेशों में बिकता है, लेकिन दोनों देशों में उसकी सामग्री, तेल, चीनी और पैकेजिंग में अंतर देखने को मिल सकता है। सबसे बड़ा सवाल फूड लेबलिंग को लेकर है। कई देशों में ज्यादा चीनी, नमक या फैट वाले प्रोडक्ट पर पैकेट के सामने ही स्पष्ट चेतावनी दी जाती है, जबकि भारत में ऐसी जानकारी आमतौर पर पैकेट के पीछे दी जाती है।

Fanta में चीनी का अंतर क्यों चर्चा में?

दावे के मुताबिक, ब्रिटेन में बिकने वाली Fanta के एक कैन में करीब 63 कैलोरी होती है, जबकि भारत में मिलने वाले इसी ब्रांड के वर्जन में चीनी की मात्रा काफी ज्यादा बताई जाती है। भारतीय वर्जन में एक आर्टिफिशियल कलर का इस्तेमाल भी किया जाता है।

यूरोप में कुछ ऐसे रंगों के इस्तेमाल पर पैकेजिंग के सामने चेतावनी देना जरूरी होता है, जबकि भारत में संबंधित जानकारी पैकेट के पीछे दी जाती है।

KitKat में भी बड़ा अंतर

इसी तरह KitKat की रेसिपी को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। भारत में बिकने वाले आम KitKat में कोको सॉलिड करीब 4.5 फीसदी बताया गया है। वहीं ऑस्ट्रेलिया में बिकने वाले KitKat की मिल्क चॉकलेट में कोको की मात्रा कम से कम 22 फीसदी बताई जाती है।

इस अंतर की वजह से प्रोडक्ट में चीनी, मिल्क पाउडर और वेजिटेबल फैट जैसे दूसरे अवयवों की हिस्सेदारी भी बदल जाती है।

भारत में Palm Oil, ब्रिटेन में Sunflower Oil?

Maggi को लेकर भी भारत और ब्रिटेन के वर्जन में अंतर की बात सामने आती रही है। भारत में बिकने वाले Maggi के कई वेरिएंट में पाम ऑयलका इस्तेमाल होता है, जबकि ब्रिटेन में बिकने वाले कुछ वर्जन में अपेक्षाकृत महंगे सनफ्लावर ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है।

खास बात यह है कि ब्रिटेन में बिकने वाले कई Maggi पैकेट भारत में ही बनाए जाते हैं। वहां पैकेट के सामने लाल चेतावनी निशान के जरिए नमक की अधिक मात्रा की जानकारी दी जाती है, जबकि भारत में इसी तरह की जानकारी पीछे न्यूट्रिशन लेबल में मिलती है।

Cerelac को लेकर भी उठे थे सवाल

Nestlé ने 2024 में भारत में बिना अतिरिक्त चीनी वाला Cerelac बेचना शुरू करने की घोषणा की थी। इससे पहले भारत में लंबे समय तक चीनी वाला वर्जन उपलब्ध था, जबकि कई दूसरे देशों में बिना अतिरिक्त चीनी वाले विकल्प पहले से मौजूद थे।

इस बदलाव को लेकर एक्टिविस्ट्स और सोशल मीडिया पर भी लंबे समय तक सवाल उठाए गए।

कंपनियां क्या कहती हैं?

फूड कंपनियों का तर्क है कि अलग-अलग देशों में लोगों की पसंद, स्वाद और खरीदने की क्षमता अलग होती है। इसी वजह से किसी प्रोडक्ट की रेसिपी और सामग्री में बदलाव किया जा सकता है।

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का यह भी कहना है कि कीमत को नियंत्रित रखने के लिए कंपनियां अलग-अलग बाजारों में अलग कच्चे माल का इस्तेमाल करती हैं। हालांकि, सवाल यह है कि कीमत और स्वाद के अलावा उपभोक्ता को प्रोडक्ट की वास्तविक पोषण संबंधी जानकारी कितनी स्पष्टता से दी जा रही है।

भारत में Front-of-Pack Labeling को लेकर बहस

दुनिया के कई देशों में पैकेट के सामने ही रंगीन चेतावनी या ट्रैफिक लाइट जैसे लेबल दिए जाते हैं। इससे ग्राहक को एक नजर में पता चल सकता है कि किसी प्रोडक्ट में चीनी, नमक या फैट की मात्रा ज्यादा है।

भारत में Front-of-Pack Labeling को लेकर बहस 2017 से जारी है। अलग-अलग समय पर रंगीन चेतावनी और स्टार रेटिंग जैसे विकल्पों पर चर्चा हुई है।

हालांकि, भारत में फिलहाल पैकेजिंग पर सामग्री और न्यूट्रिशन संबंधी जानकारी देने की व्यवस्था मुख्य रूप से पैकेट के पीछे होती है।

FSSAI के प्रस्ताव पर भी विवाद

अगस्त में फूड रेगुलेटर FSSAI ने पैकेट के सामने रंगीन चेतावनी लगाने के प्रस्ताव को आगे न बढ़ाने का फैसला किया था। इसके बजाय चीनी, फैट और नमक की मात्रा बताने वाली ब्लैक एंड व्हाइट टेबल जैसे विकल्प पर जोर दिया गया।

स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की याचिका के बाद यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा है। अदालत ने रेगुलेटर से चेतावनी वाले लेबल पर गंभीरता से विचार करने और दूसरे देशों में लागू सिस्टम का अध्ययन करने को कहा था।

भारत में बढ़ रहा मोटापे का खतरा

फूड लेबलिंग की यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब भारत में मोटापा और ज्यादा वजन एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। The Lancet में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, 2050 तक भारत में करीब 45 करोड़ लोग मोटापे या ज्यादा वजन की समस्या से प्रभावित हो सकते हैं।

दूसरी ओर, इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक भारत का पैकेज्ड फूड और बेवरेज बाजार 100 अरब डॉलर से अधिक का है और इसका बड़ा हिस्सा ऐसे उत्पादों का है जिनमें फैट, चीनी या नमक की मात्रा ज्यादा हो सकती है।

ग्राहक खरीदारी से पहले इन 3 चीजों को जरूर देखें

जब तक पैकेट के सामने स्पष्ट चेतावनी वाला सिस्टम लागू नहीं होता, उपभोक्ताओं के लिए लेबल को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।

  • 100 ग्राम में चीनी की मात्रा कितनी है, यह देखें।
  • नमक और फैट की मात्रा जरूर जांचें।
  • किस तरह के तेल का इस्तेमाल हुआ है, इसकी जानकारी लें।
  • सामग्री की सूची में जो चीज सबसे पहले लिखी होती है, उसकी मात्रा आमतौर पर सबसे ज्यादा होती है।
  • अगर सामग्री सूची में शुरुआत में ही चीनी का नाम है, तो प्रोडक्ट में उसकी मात्रा अधिक होने का संकेत मिल सकता है।

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