संजय राउत का दावा- 2029 में सत्ता में नहीं आएगा NDA, राहुल गांधी बन चुके हैं देश के ‘अनडिस्प्यूटेड लीडर’

संजय राउत का दावा- 2029 में सत्ता में नहीं आएगा NDA, राहुल गांधी बन चुके हैं देश के ‘अनडिस्प्यूटेड लीडर’

मुंबई: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव में NDA दोबारा सत्ता में नहीं आएगा और राहुल गांधी आज देश के सबसे बड़े नेताओं में शामिल हो चुके हैं।

संजय राउत ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर कहा कि इस मुद्दे पर चाहे कितना भी मंथन और चिंतन कर लिया जाए, लेकिन 2029 में NDA सत्ता में नहीं आएगा।

‘2012 में जिस जगह मोदी थे, आज वहां राहुल गांधी’

राउत ने राहुल गांधी की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह बहुत आगे निकल चुके हैं और देश के “अनडिस्प्यूटेड लीडर” बन गए हैं।

उन्होंने दावा किया, “2012 में जिस स्थान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे, उस स्थान पर आज राहुल गांधी हैं।”

राउत के इस बयान को 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्षी राजनीति और राहुल गांधी की भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है।

मराठी भाषा विवाद पर अखिलेश यादव के बयान का समर्थन

संजय राउत ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के मराठी भाषा को लेकर दिए गए बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने स्थानीय भाषा सीखने की बात कही है और हर राज्य में स्थानीय भाषा का सम्मान होना चाहिए।

राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में जो लोग कॉरपोरेट सेक्टर में बड़े पदों पर काम करते हैं, उन्हें भी मराठी भाषा आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषा को लेकर नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।

उन्होंने कहा, “हर राज्य में वहां की लोकल भाषा लोगों को अभिमान और स्वाभिमान से बोलनी चाहिए।”

अखिलेश यादव ने भाषा के राजनीतिकरण का किया था विरोध

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा था कि हर राज्य की मातृभाषा का सम्मान और उत्थान होना चाहिए, लेकिन किसी भी भाषा का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, भाषा का राजनीतिकरण देश की भाषिक और भावनात्मक एकता में दूरी पैदा कर सकता है।

अखिलेश यादव ने यह भी सवाल उठाया था कि अगर किसी राज्य में व्यवसाय करने के लिए स्थानीय भाषा की जानकारी को अनिवार्य किया जाता है, तो क्या इससे देशभर में व्यवसाय करने की संवैधानिक स्वतंत्रता प्रभावित नहीं होगी?

उन्होंने मुंबई में काम कर रही विदेशी कंपनियों का जिक्र करते हुए भाजपा पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि पार्टी बड़े कारोबारियों के प्रति नरम रुख रखती है, जबकि गरीबों और वंचितों पर ज्यादा सख्ती दिखाई जाती है।

भाषा के मुद्दे पर महाराष्ट्र की राजनीति गरम

मराठी भाषा को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक बहस पहले भी कई बार सामने आती रही है। संजय राउत के ताजा बयान के बाद स्थानीय भाषा, रोजगार और देशभर में व्यवसाय करने के संवैधानिक अधिकार को लेकर बहस फिर तेज होने के आसार हैं।

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