E20 पेट्रोल पर उठे सवालों का सरकार ने दिया जवाब

E20 पेट्रोल पर उठे सवालों का सरकार ने दिया जवाब

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नई दिल्ली: एथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर उठ रहे सवालों के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने संसद के मानसून सत्र में विस्तृत जवाब दिया। मंत्रालय ने E20 पेट्रोल से जुड़े प्रमुख सवालों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अब तक उपलब्ध तकनीकी आंकड़ों के आधार पर बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या वाहनों को नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।

E20 पेट्रोल पर सरकार का क्या कहना है?

मंत्रालय के अनुसार, देश में E15 से अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग करीब साढ़े तीन वर्षों से और E19-E20 पेट्रोल का उपयोग लगभग ढाई वर्षों से किया जा रहा है। इस दौरान एथेनॉल मिश्रण के कारण इंजन खराब होने या बड़े पैमाने पर वाहनों में तकनीकी खराबी के कोई पुष्ट मामले सामने नहीं आए हैं।

सरकार का कहना है कि यदि E20 से व्यापक नुकसान होता, तो बड़ी संख्या में वारंटी क्लेम, सर्विस कैंपेन और उपभोक्ता शिकायतें दर्ज होतीं।

एथेनॉल ब्लेंडिंग कैसे बढ़ी?

मंत्रालय के मुताबिक, एथेनॉल ब्लेंडिंग चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई गई। औसत ब्लेंडिंग प्रतिशत इस प्रकार रहा:

  • 2013-14: 1.53%
  • 2020-21: 8.1%
  • 2021-22: लगभग 10%
  • 2022-23: 12%
  • 2023-24: 14.6%
  • 2024-25: 19.2%
  • 2025-26 (नवंबर से जून): 20%

सरकार ने बताया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की शुरुआत 2001 के पायलट प्रोजेक्ट से हुई थी और 2006 में E5 लागू किया गया था।

वाहन कंपनियों के आंकड़ों का हवाला

मंत्रालय ने बताया कि एक प्रमुख कार निर्माता कंपनी के 2.84 करोड़ वाहनों के सर्विस रिकॉर्ड में एथेनॉल के कारण इंजन खराब होने, जंग लगने या पुर्जों के असामान्य घिसाव का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। इसी तरह दूसरी कंपनी के 1.4 करोड़ E20 वाहनों के अध्ययन और एक प्रमुख दोपहिया निर्माता के अनुभव में भी ऐसे नुकसान के प्रमाण नहीं मिले।

माइलेज को लेकर सरकार का जवाब

मंत्रालय के अनुसार, किसी भी वाहन का माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि ड्राइविंग स्टाइल, ट्रैफिक, वाहन की मेंटेनेंस, टायर प्रेशर और एयर कंडीशनर के उपयोग जैसे कई कारकों से प्रभावित होता है।

सरकार ने कहा कि E10 के अनुसार डिजाइन किए गए पुराने वाहनों में माइलेज 3 से 5 प्रतिशत तक कम हो सकता है। वहीं, E20 का ऑक्टेन नंबर अधिक होने के कारण इंजन में बेहतर इग्निशन और पिकअप मिलने का दावा किया गया है।

वाहन कंपनियों पर दबाव के आरोप पर क्या कहा?

सरकार ने उन आरोपों को खारिज किया कि वाहन कंपनियां सरकारी दबाव में तथ्य छिपा रही हैं। मंत्रालय का कहना है कि सूचीबद्ध कंपनियां कानूनी रूप से जवाबदेह होती हैं और किसी गंभीर तकनीकी समस्या को छिपाना उनके लिए जोखिम भरा होगा।

मंत्रालय ने 4 जुलाई 2026 को हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी उल्लेख किया, जिसमें टोयोटा किर्लोस्कर, मारुति सुजुकी, हीरो मोटोकॉर्प, हुंडई मोटर इंडिया, TVS मोटर और बजाज ऑटो के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। उनके अनुसार, E20 को व्यापक परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप जांच के बाद लागू किया गया।

ईंधन की गुणवत्ता पर सरकार का दावा

मंत्रालय के अनुसार, तेल विपणन कंपनियां देशभर के 30 हजार से अधिक पेट्रोल पंपों पर ईंधन की नियमित गुणवत्ता जांच करती हैं। सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के निर्धारित मानकों के अनुरूप ही उपलब्ध कराया जाता है।

किन सवालों पर अब भी चर्चा जारी है?

मंत्रालय की ओर से पेश किए गए अधिकांश आंकड़े वाहन कंपनियों के सर्विस रिकॉर्ड पर आधारित हैं। हालांकि, किसी स्वतंत्र या तीसरे पक्ष की दीर्घकालिक स्टडी का उल्लेख नहीं किया गया है। साथ ही, कुछ विशेषज्ञों द्वारा पुराने वाहनों की माइलेज और रबर व इलास्टोमर पार्ट्स पर लंबे समय के प्रभाव को लेकर उठाए गए सवालों पर अलग से विस्तृत डेटा साझा नहीं किया गया।

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