ब्रिक्स सम्मेलन से पहले नोएडा एयरपोर्ट पर रूसी विमानों की पहली विदेशी लैंडिंग

ब्रिक्स सम्मेलन से पहले नोएडा एयरपोर्ट पर रूसी विमानों की पहली विदेशी लैंडिंग

नोएडा एयरपोर्ट ने अपने शुरुआती परिचालन चरण में ही एक अहम उपलब्धि हासिल की है। ब्रिक्स सम्मेलन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले तीन रूसी सैन्य विमान नोएडा एयरपोर्ट पर उतरे। यह नोएडा एयरपोर्ट पर किसी विदेशी विमान की पहली रिपोर्टेड लैंडिंग बताई जा रही है। इस घटनाक्रम ने नए एयरपोर्ट को अचानक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों रूसी विमान मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे नोएडा एयरपोर्ट पहुंचे। इनमें एक IL-76 सैन्य परिवहन विमान भी शामिल था। इन विमानों के जरिए रूस की एडवांस टीम और सैन्य अधिकारी भारत पहुंचे। माना जा रहा है कि यह टीम रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी भारत यात्रा से जुड़ी तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से जरूरी समन्वय करने के लिए पहुंची है।

इन रूसी विमानों का नोएडा एयरपोर्ट पर उतरना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर के गणमान्य नेताओं की यात्राओं के दौरान आमतौर पर दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा प्रमुख एयरपोर्ट के तौर पर इस्तेमाल होता रहा है। ऐसे में नोएडा एयरपोर्ट का इस तरह के हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय मूवमेंट में इस्तेमाल होना उसकी परिचालन क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रूसी विमानों के एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, विमान बुधवार तक एयरपोर्ट पर खड़े रहे और भारतीय सुरक्षा अधिकारियों के साथ रूसी टीमों ने भी आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी। विदेशी सैन्य विमानों और हाई-प्रोफाइल विदेशी प्रतिनिधिमंडल से जुड़े मामलों में सुरक्षा और लॉजिस्टिक समन्वय बेहद महत्वपूर्ण होता है।

यह पूरा घटनाक्रम आगामी 18वें ब्रिक्स सम्मेलन से भी जुड़ा हुआ है। सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाला है। इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के शीर्ष नेता और वरिष्ठ प्रतिनिधि हिस्सा लेने वाले हैं। ऐसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन से पहले अलग-अलग देशों की सुरक्षा और एडवांस टीमें भारत पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेती हैं।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संभावित भारत यात्रा को भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से रणनीतिक और रक्षा संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के अलावा ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष और तकनीकी क्षेत्रों में भी संबंध हैं।

पुतिन की यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। इनमें S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की शेष डिलीवरी, रूस के Su-57 लड़ाकू विमान से जुड़ी संभावित बातचीत और ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। हालांकि, किसी विमान की लैंडिंग को अपने आप में किसी नए समझौते या रक्षा फैसले का संकेत नहीं माना जा सकता। यह मुख्य रूप से उच्चस्तरीय यात्रा से पहले की लॉजिस्टिक और सुरक्षा तैयारियों का हिस्सा है।

नोएडा एयरपोर्ट के लिए भी यह घटनाक्रम काफी अहम है। नए एयरपोर्ट के संचालन के शुरुआती दौर में ही विदेशी सैन्य परिवहन विमानों की लैंडिंग होना उसकी क्षमताओं को लेकर ध्यान आकर्षित करता है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिल्ली के अलावा एक और महत्वपूर्ण विमानन केंद्र के रूप में नोएडा एयरपोर्ट की भूमिका इससे और प्रमुख हो सकती है।

जैसे-जैसे ब्रिक्स सम्मेलन की तारीख नजदीक आ रही है, दिल्ली और एनसीआर में सुरक्षा और यातायात से जुड़ी तैयारियां भी तेज होने की उम्मीद है। तीन रूसी विमानों की नोएडा एयरपोर्ट पर लैंडिंग इसी व्यापक तैयारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।

कुल मिलाकर, रूसी विमानों की यह लैंडिंग केवल एक विमानन घटना नहीं है, बल्कि यह भारत में होने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और रूस के शीर्ष नेतृत्व की संभावित यात्रा से जुड़ी तैयारियों की झलक भी देती है। साथ ही, इस घटनाक्रम ने नोएडा एयरपोर्ट को भी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गतिविधियों के नक्शे पर ला खड़ा किया है।

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जितेन्द्र कुमार

जितेन्द्र कुमार उत्तर प्रदेश के हाथरस के रहने वाले एक भारतीय पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो वरिष्ठ पत्रकार और एक्सपर्ट टाइम्स नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक के रूप में जाने जाते हैं।

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