Kerala में बढ़ रहा ‘Rat Fever’ का खतरा, 5 साल में 4 गुना से ज्यादा बढ़ीं मौतें

Kerala में बढ़ रहा ‘Rat Fever’ का खतरा, 5 साल में 4 गुना से ज्यादा बढ़ीं मौतें

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केरल: केरल में बारिश और बाढ़ के मौसम के दौरान लेप्टोस्पायरोसिस यानी ‘रैट फीवर’ का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी से होने वाली वास्तविक मौतों की संख्या सरकारी आंकड़ों से अधिक हो सकती है, क्योंकि कई मामलों में संक्रमण की समय पर सही पहचान नहीं हो पाती।

घर के बगीचे की देखभाल, खेतों में काम करने या बाहर रोजमर्रा के काम करने के दौरान दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

2025 में 390 मौतें दर्ज

अस्पतालों के रिकॉर्ड से जुटाए गए डेथ ऑडिट डेटा के मुताबिक, 2025 में लेप्टोस्पायरोसिस से 390 मौतें दर्ज की गईं। इनमें शारीरिक मेहनत करने वाले मजदूरों की संख्या सबसे ज्यादा रही।

आंकड़ों के अनुसार, कुल मौतों में 37 फीसदी यानी 47 मौतें शारीरिक मेहनत करने वाले मजदूरों से जुड़ी थीं। वहीं, 14 मौतें कृषि मजदूरों और करीब 10 फीसदी यानी 13 मौतें घरेलू काम करने वाली महिलाओं की थीं।

40 से 69 साल की उम्र के लोगों पर ज्यादा असर

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 40 से 69 साल की उम्र के लोग लेप्टोस्पायरोसिस से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बीमारी के कई मामलों में समय पर सही पहचान नहीं होने के कारण मौतों का वास्तविक आंकड़ा सरकारी आंकड़ों से ज्यादा हो सकता है।

संक्रामक बीमारियों से होने वाली मौतों में बड़ी हिस्सेदारी

केरल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (K-CDC) के निदेशक और तिरुवनंतपुरम गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रोफेसर डॉ. अल्थाफ ए के अनुसार, लेप्टोस्पायरोसिस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।

उनका कहना है कि राज्य में संक्रामक बीमारियों से होने वाली कुल मौतों में लेप्टोस्पायरोसिस की हिस्सेदारी 52 फीसदी तक है। विशेषज्ञ के मुताबिक, सही जानकारी और शुरुआती स्तर पर उचित उपचार मिलने से बड़ी संख्या में मौतों को रोका जा सकता है।

पांच साल में चार गुना से ज्यादा बढ़ीं मौतें

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2016-20 के दौरान लेप्टोस्पायरोसिस से 319 मौतें दर्ज की गई थीं। वहीं, 2021-25 के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर 1,455 हो गया।

इसी अवधि में बीमारी की मृत्यु दर भी करीब 4.2 फीसदी से बढ़कर 6 फीसदी हो गई। इसके अलावा, रिपोर्ट किए गए मामलों की संख्या में भी तीन गुना से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई।

केरल में मजबूत स्वास्थ्य सेवाओं का नेटवर्क होने के बावजूद लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण से होने वाली गंभीर मौतों का एक महत्वपूर्ण कारण बना हुआ है। बारिश और बाढ़ के मौसम में इस बीमारी को लेकर जागरूकता और समय पर इलाज बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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