जम्मू-कश्मीर में रेलवे की बड़ी उपलब्धि, पहली बार कश्मीर घाटी पहुंची पेट्रोल-डीजल से भरी मालगाड़ी

जम्मू-कश्मीर में रेलवे की बड़ी उपलब्धि, पहली बार कश्मीर घाटी पहुंची पेट्रोल-डीजल से भरी मालगाड़ी

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नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने जम्मू-कश्मीर में रेलवे लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रेलवे ने पहली बार पेट्रोल और डीजल जैसे जरूरी ईंधन उत्पादों से भरी मालगाड़ी को सफलतापूर्वक कश्मीर घाटी तक पहुंचाया है।

यह मालगाड़ी नवनिर्मित उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) के जरिए घाटी तक पहुंची। यह रेल लिंक हर मौसम में कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिहाज से रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

करीब 50 टैंकरों के साथ पहुंची ट्रेन

इस ऐतिहासिक ट्रायल रन में पेट्रोल और डीजल जैसे पेट्रोलियम उत्पादों को ले जाने वाले करीब 50 टैंकर शामिल थे। ट्रेन ने पहाड़ी इलाकों से गुजरते हुए सफलतापूर्वक कश्मीर घाटी तक अपनी यात्रा पूरी की।

यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी और खराब मौसम के कारण कश्मीर घाटी तक सड़क मार्ग से जरूरी सामान पहुंचाने में कई बार मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

NH-44 पर निर्भरता होगी कम

USBRL रेल नेटवर्क के विकास से कश्मीर घाटी तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (NH-44) पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।

NH-44 पर भारी बर्फबारी, भूस्खलन और अन्य कारणों से कई बार यातायात बाधित हो जाता है। ऐसे में रेल नेटवर्क के जरिए जरूरी सामानों की सप्लाई अधिक व्यवस्थित तरीके से जारी रखने में मदद मिल सकती है।

रेल से ईंधन की ढुलाई से लॉजिस्टिक्स को फायदा

सड़क मार्ग से टैंकरों के जरिए ईंधन पहुंचाने की तुलना में बड़ी मात्रा में रेल के जरिए माल ढुलाई से परिवहन क्षमता बढ़ने और लिक्विड फ्यूल लॉजिस्टिक्स की क्षेत्रीय लागत कम होने की उम्मीद है।

इससे कश्मीर घाटी में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही रोजमर्रा की नागरिक जरूरतों, औद्योगिक गतिविधियों और पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों के लिए ईंधन की उपलब्धता बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

दूध, चावल और सीमेंट के बाद ईंधन की रेल ढुलाई

ईंधन की इस सफल रेल ढुलाई से पहले इसी रेल नेटवर्क के जरिए दूध, चावल और सीमेंट जैसे जरूरी सामानों की सफल ढुलाई की जा चुकी है।

अब ईंधन की सप्लाई भी रेल नेटवर्क से शुरू होने की दिशा में यह ट्रायल रन एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे USBRL की ऑपरेशनल क्षमता का अधिक व्यापक इस्तेमाल संभव होगा और कश्मीर घाटी की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

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