नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के आरक्षण को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने उनके बयान पर सवाल उठाते हुए भाजपा और आरएसएस की मंशा पर निशाना साधा है।
मोहन भागवत ने क्या कहा?
मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि “आरक्षण उत्थान के लिए है, स्थायी नहीं। जिन लोगों को इसका लाभ मिल चुका है, उन्हें इसे छोड़ देना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण के मुद्दे का राजनीतिकरण जानबूझकर किया गया है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर आरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा तेज है।
सपा ने NFS और EWS का मुद्दा उठाया
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि मोहन भागवत छात्रों से संवाद की बात तब कर रहे हैं, जब भाजपा इन मुद्दों पर घिरी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस सरकार से कभी सवाल नहीं करता और केवल पिछड़ों व दलितों के आरक्षण पर ही टिप्पणी करता है। उन्होंने कहा कि 69,000 शिक्षक भर्ती, विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों और NFS (Not Found Suitable) जैसे मुद्दों पर आरएसएस की चुप्पी सवाल खड़े करती है।
सपा नेता ने यह भी कहा कि यदि आरक्षण पर सलाह दी जा रही है, तो आर्थिक रूप से संपन्न लोग EWS आरक्षण छोड़ें, ताकि उसका लाभ जरूरतमंद लोगों को मिल सके।
कांग्रेस ने बताया संवैधानिक अधिकार
हरियाणा से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद करमवीर सिंह बौध ने कहा कि आरक्षण कोई खैरात नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने सामाजिक न्याय को ध्यान में रखते हुए आरक्षण की व्यवस्था की थी और इसे उसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए।
प्रमोद तिवारी की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने भी मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर BJP और RSS की विचारधारा पहले से ही स्पष्ट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस आरक्षण व्यवस्था को जारी रखने के पक्ष में नहीं हैं।
मोहन भागवत के बयान के बाद आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है और इस पर विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं।
