देश के ग्रामीण और दूर-दराज इलाकों में घर, खेती और छोटे कारोबार के लिए वित्तीय मदद उपलब्ध कराने वाले ग्रामीण सहकारी बैंकों (RCBs) को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है। RBI ने इन बैंकों को अधिक ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी देने के साथ-साथ उनके रिस्क मैनेजमेंट को मजबूत करने के लिए ड्राफ्ट निर्देश जारी किए हैं।
इन प्रस्तावित बदलावों में कंसंट्रेशन रिस्क मैनेजमेंट और क्रेडिट सुविधाओं से जुड़े 2025 के नियमों में संशोधन शामिल है। अंतिम निर्णय से पहले RBI ने इन प्रस्तावों पर 28 अगस्त तक जनता से सुझाव और राय मांगी है।
ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए क्या बदल सकता है?
RBI के मुताबिक, प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य ग्रामीण सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिरता मजबूत करना और ग्रामीण क्षेत्रों में कर्ज लेने वालों की बदलती जरूरतों के अनुसार बैंकों को अधिक ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी देना है।
प्रस्ताव के तहत किसी एकल कर्जदार यानी Single Counterparty को बैंक की Tier-1 Capital के अधिकतम 20 फीसदी तक कर्ज देने की सीमा तय करने का प्रस्ताव है। वहीं, किसी एक समूह को बैंक की Tier-1 Capital के अधिकतम 25 फीसदी तक कर्ज दिया जा सकेगा।
इसका उद्देश्य बैंकों के किसी एक या कुछ बड़े कॉरपोरेट कर्जदारों पर अत्यधिक निर्भरता और जोखिम को कम करना है।
बड़े ग्रामीण बैंकों में 3 करोड़ रुपये तक होम लोन का प्रस्ताव
ग्रामीण इलाकों में पक्के मकानों के निर्माण और पुराने मकानों की मरम्मत की बढ़ती जरूरत को देखते हुए RBI ने होम लोन की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।
प्रस्ताव के अनुसार, 10,000 करोड़ रुपये से अधिक जमा वाले ग्रामीण सहकारी बैंक 3 करोड़ रुपये तक का होम लोन स्वीकृत कर सकेंगे।
इसके अलावा, 10,000 करोड़ रुपये से अधिक जमा वाले बैंकों के मामले में होम लोन की अवधि और मोरेटोरियम तय करने का अधिकार बैंक के बोर्ड को देने का भी प्रस्ताव है।
सेक्टर-वाइज एक्सपोजर लिमिट में बदलाव
RBI ने ज्यादातर सेक्टर के लिए लागू सेक्टर-वाइज एक्सपोजर लिमिट को हटाने का भी प्रस्ताव दिया है। हालांकि, रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक्सपोजर लिमिट जारी रखने का प्रस्ताव है।
इस बदलाव से ग्रामीण सहकारी बैंकों को स्थानीय जरूरत और मांग के आधार पर कृषि, MSME और स्थानीय कारोबार जैसे क्षेत्रों में कर्ज देने के लिए अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है।
ग्राहकों और कर्जदारों को क्या फायदा होगा?
फिलहाल ये सिर्फ ड्राफ्ट प्रस्ताव हैं और इन पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इसलिए अभी लोन के मौजूदा नियमों में तत्काल कोई बदलाव नहीं होगा।
अगर प्रस्ताव लागू होते हैं तो बड़े ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए बड़े हाउसिंग लोन उपलब्ध कराना और ग्राहकों की जरूरत के अनुसार लोन की अवधि और मोरेटोरियम जैसी शर्तें तय करना आसान हो सकता है।
इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में सहकारी बैंकों पर निर्भर कर्जदारों के लिए भविष्य में हाउसिंग फाइनेंस के विकल्प बढ़ सकते हैं और लोन की सुविधाएं अधिक लचीली हो सकती हैं।
