PM मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर विवाद, CJP प्रवक्ता सौरव दास ने साधा निशाना

PM मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर विवाद, CJP प्रवक्ता सौरव दास ने साधा निशाना

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नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। CJP प्रवक्ता सौरव दास ने पीएम मोदी के बयान पर आपत्ति जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो री-पोस्ट किया और प्रधानमंत्री पर निशाना साधा।

‘पढ़े-लिखे युवाओं को नक्सली कैसे कह सकते हैं?’

सौरव दास ने री-पोस्ट किए गए वीडियो में सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री का राजनीतिक समय अब खत्म होने की ओर है। उन्होंने कहा कि जनता कथित तौर पर सरकार के झूठ, ड्रामे और खोखले वादों से परेशान हो चुकी है।

दास ने पीएम मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने से युवाओं की समस्याएं खत्म नहीं होंगी। उन्होंने सवाल किया कि सरकार से सवाल करने वाले पढ़े-लिखे युवाओं को नक्सली कैसे कहा जा सकता है।

CJP प्रवक्ता ने इसे अहंकार बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की समस्याओं को हल करने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि अब चेतावनी की घंटी बज चुकी है और जागने का समय आ गया है।

पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस भाषण में क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने भाषण में ‘हथियारी नक्सल’ और ‘दिमागी नक्सल’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद काफी हद तक खत्म हो चुका है, लेकिन कुछ ‘दिमागी नक्सल’ समाज को गलत दिशा में ले जाने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान करनी होगी और उन्हें अलग-थलग करना होगा। उन्होंने युवाओं से विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान भी किया।

भाषण में युवाओं पर रहा खास फोकस

पीएम मोदी ने अपने करीब 75 मिनट के स्वतंत्रता दिवस भाषण में 52 बार युवाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार अगले एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI स्किल्स की ट्रेनिंग देने की दिशा में काम करेगी।

इसके अलावा प्रधानमंत्री ने गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के युवाओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए फ्री ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की बात भी कही।

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