क्या एक ही इलाज से खत्म हो सकता है हाई कोलेस्ट्रॉल? नई जीन थेरेपी ने जगाई उम्मीद

क्या एक ही इलाज से खत्म हो सकता है हाई कोलेस्ट्रॉल? नई जीन थेरेपी ने जगाई उम्मीद

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नई दिल्ली: हाई कोलेस्ट्रॉल से जूझ रहे लोगों के लिए एक नई रिसर्च उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। लंदन के मेडिकल रिसर्चर्स से जुड़े शुरुआती क्लिनिकल ट्रायल में एक एक्सपेरिमेंटल जीन थेरेपी की एक ही डोज ने LDL यानी ‘बैड’ कोलेस्ट्रॉल को 62 फीसदी तक कम कर दिया। खास बात यह रही कि इसका असर करीब एक साल तक बना रहा।

रिसर्चर्स का कहना है कि अगर बड़े क्लिनिकल ट्रायल में यह थेरेपी सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है, तो भविष्य में कुछ मरीजों को रोजाना कोलेस्ट्रॉल की दवा लेने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, अभी इसे हाई कोलेस्ट्रॉल का स्थापित या पूरी तरह ठीक करने वाला इलाज नहीं माना जा सकता।

क्या है VERVE-102 थेरेपी?

VERVE-102 एक एक्सपेरिमेंटल जीन-एडिटिंग थेरेपी है, जिसे IV ड्रिप के जरिए दिया जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने वाले एक जीन को बदलने के उद्देश्य से काम करती है।

शुरुआती ट्रायल में एक डोज के बाद LDL कोलेस्ट्रॉल में 62 फीसदी तक कमी दर्ज की गई और यह कमी एक साल तक बनी रही। ट्रायल के दौरान रिसर्चर्स को सुरक्षा से जुड़ी कोई गंभीर समस्या नहीं मिली।

इस रिसर्च के नतीजे प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल ‘द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन’ में प्रकाशित हुए हैं।

हाई LDL क्यों है खतरनाक?

LDL को आमतौर पर ‘बैड’ कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। इसका स्तर बढ़ने पर धमनियों में फैटी प्लाक जमा हो सकता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

मौजूदा समय में स्टैटिन जैसी दवाओं के जरिए LDL कोलेस्ट्रॉल को काफी कम किया जा सकता है। हालांकि, इन दवाओं को आमतौर पर लंबे समय तक और नियमित रूप से लेना पड़ता है।

रोजाना दवा लेने की चुनौती

रिसर्च से पता चलता है कि लगभग आधे मरीज कोलेस्ट्रॉल की दवा शुरू करने के एक साल के भीतर ही उसे लेना बंद कर देते हैं। इसके पीछे रोजाना दवा लेने में होने वाली परेशानी और संभावित साइड इफेक्ट्स प्रमुख कारण बताए जाते हैं।

इनमें मांसपेशियों में दर्द की शिकायत सबसे आम समस्याओं में से एक है। ऐसे में वैज्ञानिक ऐसी तकनीक विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका असर लंबे समय तक बना रहे।

डॉक्टर ने बताया क्यों है यह बड़ी उपलब्धि?

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) में क्लिनिकल एकेडमिक और बार्ट्स हेल्थ तथा UCL हॉस्पिटल्स (UCLH) में कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट प्रोफेसर रियाज़ पटेल इस ट्रायल के लोकल लीड्स में शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि यह अभी शुरुआती दौर है, लेकिन इसके नतीजे बेहद उत्साहजनक हैं। उनके मुताबिक, परिणाम बताते हैं कि यह तकनीक काम कर सकती है, सुरक्षित नजर आती है और कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद कर सकती है।

भारत में भी हृदय रोग बड़ी चुनौती

भारत में भी हृदय रोग एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश में हर साल बड़ी संख्या में लोगों की मौत हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों से होती है।

ऐसे में LDL कोलेस्ट्रॉल को लंबे समय तक नियंत्रित रखने वाली कोई सुरक्षित और प्रभावी तकनीक भविष्य में हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

क्या एक डोज से हमेशा के लिए खत्म होगा कोलेस्ट्रॉल?

अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। VERVE-102 के शुरुआती नतीजे उत्साहजनक जरूर हैं, लेकिन यह अभी एक प्रयोगात्मक थेरेपी है। इसकी सुरक्षा और लंबे समय तक प्रभाव को साबित करने के लिए बड़े और लंबे क्लिनिकल ट्रायल जरूरी होंगे।

अगर आगे के अध्ययनों में इसके फायदे और सुरक्षा की पुष्टि होती है, तभी यह तय हो पाएगा कि एक बार की जीन थेरेपी लंबे समय तक हाई LDL को नियंत्रित करने का प्रभावी विकल्प बन सकती है या नहीं।

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