मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा विरोध अब राजनीतिक रूप से और व्यापक होने के संकेत दे रहा है। Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुंबई में आयोजित प्रदर्शन के दौरान ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो आंदोलन का अगला चरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी हो सकता है।
दीपके का यह बयान ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूचियों में संशोधन और Special Intensive Revision (SIR) को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने मतदाता सूचियों में नाम हटाए जाने और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इस तरह के आरोपों को खारिज करते हुए मतदाता सूची के संशोधन को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का हिस्सा बताया है।
मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन में CJP समर्थकों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी आपत्तियां जाहिर कीं। दीपके ने कहा कि उनकी प्राथमिक मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने आगे यह भी चेतावनी दी कि यदि यह मांग पूरी नहीं होती तो आंदोलन को दिल्ली तक ले जाया जा सकता है।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची को अपडेट करता है, ताकि मृत व्यक्तियों, स्थान बदल चुके मतदाताओं और अन्य अयोग्य प्रविष्टियों को हटाया जा सके तथा पात्र नागरिकों के नाम सूची में शामिल किए जा सकें। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर यह सवाल भी उठता रहा है कि पात्र मतदाताओं के नाम गलती से न हट जाएं और प्रभावित नागरिकों को सुधार का पर्याप्त अवसर मिले।
इसी मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद देखने को मिल रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव पारदर्शी तरीके से किए जाने चाहिए। वहीं चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में किसी तरह की राजनीतिक हेरफेर के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
विवाद को तब और चर्चा मिली जब चुनाव आयोग के भीतर निर्णयों को लेकर मतभेदों की खबरें सामने आईं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयुक्तों के बीच SIR से जुड़े फैसलों को लेकर आपत्तियों का उल्लेख किया गया। इन रिपोर्टों के बाद आयोग के आंतरिक कामकाज और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी सार्वजनिक चर्चा बढ़ी। हालांकि, किसी संस्थान के भीतर मतभेद होना अपने आप में किसी गैरकानूनी कार्रवाई का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
अभिजीत दीपके और CJP ने इसी माहौल के बीच अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने की घोषणा की है। रिपोर्टों के मुताबिक, संगठन दिल्ली में भी प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले राजधानी में प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी। प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच विरोध-प्रदर्शन की अनुमति तथा कानून-व्यवस्था को लेकर भी मतभेद सामने आए।
दीपके के ताजा बयान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उनका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा संकेत है। उन्होंने आंदोलन को केवल चुनाव आयोग तक सीमित न रखने की बात कही है। हालांकि, यह CJP और दीपके की राजनीतिक मांग है, इसे किसी न्यायालय, चुनाव आयोग या अन्य संवैधानिक संस्था की आधिकारिक टिप्पणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि आगे CJP का आंदोलन किस दिशा में जाता है और चुनाव आयोग इन राजनीतिक मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देता है। इसके साथ ही SIR से संबंधित प्रक्रियाओं, मतदाता सूची में बदलाव और प्रभावित मतदाताओं के लिए उपलब्ध शिकायत निवारण व्यवस्था पर भी ध्यान बना रहेगा।
इस विवाद का मूल प्रश्न मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता से जुड़ा है। लोकतांत्रिक चुनावों के लिए यह जरूरी है कि पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में सही तरीके से दर्ज हों और किसी भी गलत प्रविष्टि या नाम हटाए जाने की स्थिति में सुधार की प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध हो।
फिलहाल, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग CJP के आंदोलन का केंद्र बनी हुई है। दीपके के बयान ने इस आंदोलन को प्रधानमंत्री तक जोड़ने का संकेत देकर राजनीतिक चर्चा को और व्यापक कर दिया है। आने वाले दिनों में प्रस्तावित प्रदर्शनों, चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर इस विवाद की अगली दिशा स्पष्ट हो सकती है।
