चमरौआ में SIR के बाद घटे 29 हजार से ज्यादा वोटर, 2022 और 2024 में सपा का रहा दबदबा; जानें पूरा समीकरण

चमरौआ में SIR के बाद घटे 29 हजार से ज्यादा वोटर, 2022 और 2024 में सपा का रहा दबदबा; जानें पूरा समीकरण

रामपुर: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले की चमरौआ विधानसभा सीट (विधानसभा संख्या-35) मुस्लिम बहुल सीटों में शामिल है। 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां समाजवादी पार्टी (सपा) के नसीर अहमद खान ने जीत दर्ज की थी। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में भी चमरौआ विधानसभा क्षेत्र में सपा ने बीजेपी पर बड़ी बढ़त बनाई।

अब 2026 में एसआईआर (SIR) के बाद इस सीट पर मतदाताओं की संख्या में भी बड़ा बदलाव हुआ है। नए आंकड़ों के मुताबिक चमरौआ विधानसभा क्षेत्र में अब 2,84,309 मतदाता बचे हैं।

SIR के बाद 29,279 मतदाता घटे

2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान चमरौआ विधानसभा सीट पर कुल 3,13,588 मतदाता थे। SIR की प्रक्रिया के बाद यह संख्या घटकर 2,84,309 रह गई है।

यानी इस सीट पर 29,279 मतदाता कम हुए हैं। आगामी चुनावों में मतदाता सूची में हुए इस बदलाव का असर राजनीतिक दलों की रणनीति और बूथ स्तर के समीकरण पर भी पड़ सकता है।

2022 में सपा के नसीर अहमद खान बने थे विधायक

2022 के विधानसभा चुनाव में चमरौआ सीट पर समाजवादी पार्टी के नसीर अहमद खान ने जीत हासिल की थी। उन्होंने बीजेपी के मोहन लोधीको करीब 34 हजार वोटों के अंतर से हराया था।

2022 के चुनाव में प्रमुख उम्मीदवारों और दलों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:

  • सपा- नसीर अहमद खान: करीब 50.34% वोट
  • बीजेपी- मोहन लोधी: करीब 33.24% वोट
  • कांग्रेस- अली युसूफ अली: करीब 18 हजार वोट
  • बसपा- अब्दुल मुस्तफा हुसैन: करीब 10 हजार वोट

सपा और बीजेपी के बीच वोट शेयर का अंतर करीब 17 प्रतिशत रहा था।

2024 लोकसभा चुनाव में भी सपा को बड़ी बढ़त

2024 के लोकसभा चुनाव में भी चमरौआ विधानसभा क्षेत्र में सपा का प्रदर्शन मजबूत रहा। इस सीट पर मिले वोटों का आंकड़ा इस प्रकार रहा:

पार्टीवोट
सपा1,04,528
बीजेपी65,280
बसपा9,412

सपा के मोहिबुल्लाह नदवी ने बीजेपी के घनश्याम लोधी को रामपुर लोकसभा सीट पर हराया था। चमरौआ विधानसभा क्षेत्र में सपा को बीजेपी के मुकाबले 39,248 वोटों की बढ़त मिली।

2022 और 2024 में कैसे बदला वोटिंग पैटर्न?

चमरौआ सीट पर 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा को मुख्य रूप से मुस्लिम, यादव और कुछ सिख मतदाताओं का समर्थन मिला था। वहीं बीजेपी को लोधी, सैनी और अन्य गैर-यादव ओबीसी वर्गों के साथ सामान्य वर्ग का समर्थन मिला। एससी समाज के भी काफी वोट बीजेपी के पक्ष में जाने का दावा किया गया।

कांग्रेस को 2022 में कुछ मुस्लिम वोट मिले थे, जबकि बसपा अपने पारंपरिक एससी वोट बैंक तक काफी हद तक सीमित रही।

2024 के लोकसभा चुनाव में तस्वीर कुछ बदली। विश्लेषण के मुताबिक, 2022 में कांग्रेस की ओर गया मुस्लिम वोट 2024 में बड़ी संख्या में सपा की तरफ शिफ्ट हुआ। बीजेपी को गैर-यादव ओबीसी, सामान्य वर्ग और एससी समाज के कुछ वोटों का समर्थन मिला।

सिख वोट भी बना महत्वपूर्ण फैक्टर

चमरौआ सीट के चुनावी समीकरण में सिख मतदाताओं का रुख भी चर्चा में रहा है। 2022 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव में सिख समुदाय के कुछ वोट सपा की ओर जाने की बात सामने आई।

रामपुर की स्वार और चमरौआ दोनों विधानसभा सीटों पर इस तरह का वोटिंग पैटर्न देखने को मिला। इससे पहले के चुनावों में सिख मतदाताओं का सपा की ओर ऐसा रुझान प्रमुखता से नजर नहीं आता था।

चमरौआ का जातीय समीकरण क्या है?

चमरौआ विधानसभा सीट में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक मानी जाती है। इसके बाद लोधी मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। आपके दिए गए अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक जातीय समीकरण इस प्रकार है:

जाति/समुदायअनुमानित मतदाता
मुस्लिम1.50 लाख
लोधी50 हजार
एससी26 हजार
सैनी20 हजार
सिख9 हजार
क्षत्रिय6 हजार
पाल5 हजार
यादव5 हजार
कश्यप5 हजार
प्रजापति5 हजार

इसके अलावा अन्य पिछड़ी जातियों की संख्या करीब 40 हजार के आसपास और सामान्य वर्ग के मतदाता करीब 10 हजार बताए जाते हैं।

मुस्लिम वोट सबसे बड़ा फैक्टर

चमरौआ विधानसभा सीट में करीब 1.50 लाख मुस्लिम मतदाता होने का अनुमान है। यही वजह है कि मुस्लिम वोट यहां चुनावी नतीजों में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसके बाद करीब 50 हजार लोधी मतदाता और अन्य पिछड़ी जातियों के वोट चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं। एससी मतदाताओं की संख्या करीब 26 हजार बताई गई है, जिनमें लगभग 15 हजार को बसपा का पारंपरिक वोटर माना जाता है।

2027 के लिए क्या होगा चुनावी समीकरण?

2022 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि चमरौआ में सपा ने लगातार मजबूत प्रदर्शन किया है। वहीं बीजेपी के लिए गैर-यादव ओबीसी, लोधी, सैनी, सामान्य वर्ग और एससी वोट महत्वपूर्ण आधार बने हुए हैं।

SIR के बाद करीब 29 हजार मतदाताओं की कमी के कारण मतदाता सूची में हुए बदलाव भी आने वाले चुनाव में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, नए चुनावी नतीजे कई कारकों पर निर्भर करेंगे, जिनमें उम्मीदवार, गठबंधन, स्थानीय मुद्दे और अलग-अलग सामाजिक समूहों का मतदान रुख प्रमुख रहेगा।

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