अमेरिका के कैलिफोर्निया में भारतीय मूल की 38 वर्षीय शालिनी ठाकुर की हत्या ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। सैक्रामेंटो में हुई इस हत्या की जांच के दौरान पुलिस के सामने जो घटनाक्रम आया, उसने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर महीनों तक कथित पीछा किए जाने और परेशान किए जाने के बाद भी शालिनी को सुरक्षित क्यों नहीं रखा जा सका।
पुलिस के मुताबिक, शालिनी की 8 सितंबर को एक Panera Bread रेस्टोरेंट के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। मामले में 22 वर्षीय रोहित रोहित को संदिग्ध आरोपी बताया गया। घटना के बाद पुलिस ने उसका पीछा किया और उसे हाईवे-50 के पास घेरा। पुलिस के मुताबिक, बाद में उसकी कार के अंदर से उसका शव मिला और प्रथम दृष्टया मौत को आत्महत्या माना गया।
लेकिन इस मामले की सबसे परेशान करने वाली बात हत्या से पहले की घटनाएं हैं।
जांच अधिकारियों और अदालत में दाखिल दस्तावेजों के मुताबिक, शालिनी ने आरोप लगाया था कि रोहित लंबे समय से उसका पीछा कर रहा था और उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहा था। यह सिलसिला कथित तौर पर सितंबर 2025 के आसपास शुरू हुआ था और समय के साथ गंभीर होता गया।
जनवरी में शालिनी को अपनी कार के हुड के नीचे एक Apple AirTag मिला। AirTag एक छोटा ट्रैकिंग डिवाइस है, जिसका इस्तेमाल आम तौर पर सामान या व्यक्तिगत वस्तुओं की लोकेशन पता करने के लिए किया जाता है। लेकिन इस मामले में जांचकर्ताओं को संदेह था कि इसका इस्तेमाल शालिनी की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जा रहा था।
इसके बाद कथित तौर पर उसकी कार के टायर से भी छेड़छाड़ की गई। पुलिस के अनुसार, रोहित ने कथित तौर पर उसकी कार का टायर पंक्चर या डिफ्लेट किया और फिर शालिनी के काम की जगह तक उसका पीछा किया। वहां उसने मदद करने की पेशकश भी की।
मामला यहीं नहीं रुका।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर शालिनी के अपार्टमेंट की चाबी की एक कॉपी हासिल कर ली थी। पुलिस के अनुसार, वह एक बार रात के समय शालिनी के घर में भी दाखिल हुआ, जब वह सो रही थी। बाद में उसने कथित तौर पर यह दावा किया कि वह शालिनी की चिंता के कारण घर में गया था क्योंकि वह उससे संपर्क नहीं कर पा रहा था।
शालिनी ने अदालत में दाखिल याचिका में कथित तौर पर बताया कि रोहित उसके घर के बाहर काफी समय तक इंतजार करता था। उसने यह भी आरोप लगाया कि वह उसके सामाजिक संबंधों को नियंत्रित करने की कोशिश करता था और उस पर शादी करने का दबाव डाल रहा था।
इन घटनाओं के बीच शालिनी ने मार्च में पुलिस से संपर्क किया था। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार, उस समय उसने आपराधिक कार्रवाई या restraining order यानी कानूनी सुरक्षा आदेश लेने से इनकार किया था। पुलिस उसके संपर्क में बनी रही और बाद में उसे कानूनी सुरक्षा लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
मई में शालिनी को रोहित के खिलाफ civil harassment restraining order मिल गया। यह आदेश 19 मई को उसे सौंपा गया था और इसके 2027 तक लागू रहने की बात सामने आई।
लेकिन कथित तौर पर इसके बाद भी संपर्क पूरी तरह बंद नहीं हुआ।
29 जुलाई को शालिनी ने पुलिस को बताया कि उसके घर के बाहर किराने का सामान छोड़ा गया था। पुलिस ने इसे restraining order के संभावित उल्लंघन के तौर पर देखा और आरोपी को तलाशने की कोशिश की, लेकिन वह उस समय नहीं मिला।
इसके कुछ ही सप्ताह बाद मामला खौफनाक मोड़ पर पहुंच गया।
8 सितंबर को पुलिस के अनुसार, रोहित उस शॉपिंग सेंटर में पहले से मौजूद था, जहां शालिनी काम करती थी। शालिनी के वहां पहुंचने के बाद दोनों के बीच कथित तौर पर सामना हुआ। पुलिस के मुताबिक, शालिनी ने वहां से भागने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने उसका पीछा किया और गोली चला दी।
शालिनी की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद आरोपी कार से फरार हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी और वाहन की पहचान के आधार पर पुलिस ने हाईवे-50 के पास उसकी लोकेशन का पता लगाया। इसके बाद पुलिस और आरोपी के बीच गतिरोध की स्थिति बनी रही। अंततः पुलिस ने उसकी कार के अंदर उसे मृत पाया।
शालिनी की मौत के बाद उसकी मां ने पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि शालिनी पहले से परेशान थी और उसने मदद लेने की कोशिश की थी।
यह मामला अब अमेरिका में stalking यानी किसी व्यक्ति का लगातार पीछा करने, उसकी गतिविधियों पर नजर रखने और उसकी निजी जिंदगी में जबरन दखल देने के गंभीर खतरे की ओर भी ध्यान खींच रहा है।
AirTag से कथित निगरानी, कार के साथ छेड़छाड़, घर में कथित घुसपैठ, लगातार पीछा करना और restraining order के बावजूद कथित संपर्क—इन घटनाओं को एक साथ देखा जाए तो यह मामला बेहद गंभीर तस्वीर पेश करता है।
हालांकि आरोपी की मौत के कारण उसके खिलाफ अदालत में मुकदमा चल नहीं पाया, इसलिए उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों को न्यायिक रूप से साबित नहीं किया गया है। फिर भी पुलिस और अदालत में दर्ज घटनाक्रम ने शालिनी ठाकुर की मौत से पहले के महीनों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है—जब किसी व्यक्ति के खिलाफ बार-बार शिकायतें सामने आ रही हों और उसकी हरकतें लगातार गंभीर होती जा रही हों, तो पीड़ित की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से कार्रवाई कर सकती है?
शालिनी ठाकुर की कहानी अब सिर्फ एक हत्या की जांच नहीं रह गई है। यह stalking के बढ़ते खतरे, कानूनी सुरक्षा की सीमाओं और संभावित खतरे के शुरुआती संकेतों को गंभीरता से लेने की जरूरत पर भी बहस खड़ी कर रही है।
