अमेरिका-ईरान टकराव हुआ और खतरनाक, 5 ईरानी तेल टैंकर तबाह; जॉर्डन में अमेरिकी ठिकाने पर ईरानी मिसाइल हमला

अमेरिका-ईरान टकराव हुआ और खतरनाक, 5 ईरानी तेल टैंकर तबाह; जॉर्डन में अमेरिकी ठिकाने पर ईरानी मिसाइल हमला

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव अब एक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के पांच तेल टैंकरों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसके साथ ही ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास कई जहाजों को भी निशाना बनाने का दावा किया है।

अमेरिका के मुताबिक, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने लगातार दो दिनों तक अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में किसी अमेरिकी सैनिक या नौसैनिक की मौत नहीं हुई। इसके बाद अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पांच ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों को नष्ट कर दिया।

अमेरिका का दावा है कि इन तेल टैंकरों का संबंध ऐसे नेटवर्क से था, जिसके जरिए ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड को आर्थिक मदद मिलती थी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया कि अगर ईरान अमेरिकी युद्धपोतों पर हमले जारी रखता है, तो उसके तेल कारोबार को नुकसान पहुंचाया जाएगा।

लेकिन अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने भी ज्यादा देर इंतजार नहीं किया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने जॉर्डन में अल-अजराक के पास मौजूद उस सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी सेना करती है। ईरानी पक्ष ने हमले में भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

जॉर्डन की सेना ने बताया कि ईरान की ओर से उसके क्षेत्र में 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से 18 को उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने रोक दिया। बाकी दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। जॉर्डन के अनुसार, इस हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों ने भी कहा कि जॉर्डन में तैनात उनके सैनिक सुरक्षित हैं और हमले का प्रभाव सीमित रहा।

तनाव केवल जमीन तक सीमित नहीं रहा। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास 10 जहाजों को निशाना बनाने का दावा किया। इनमें दो अमेरिकी जहाज और आठ तेल टैंकर शामिल बताए गए हैं। ईरान ने आरोप लगाया कि ये जहाज ऐसे क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे जिसे उसने प्रतिबंधित और असुरक्षित घोषित किया है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व इस पूरे संकट को और गंभीर बनाता है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल इस समुद्री रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही होती है। अगर यहां लंबे समय तक सैन्य तनाव बना रहा या जहाजों की आवाजाही बाधित हुई, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

इसी डर का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखाई देने लगा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत बुधवार को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई, जो जुलाई के बाद पहली बार इस स्तर पर पहुंची है। बाजार विशेषज्ञों को आशंका है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और बढ़ता है, तो तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है और कीमतों में और तेजी आ सकती है।

इस संकट का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव उन देशों के लिए भी चिंता का कारण है जो कच्चे तेल के आयात पर निर्भर हैं। तेल की कीमतों में तेजी से परिवहन लागत, महंगाई और औद्योगिक उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है।

इस बीच, क्षेत्रीय स्तर पर भी स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। ईरान समर्थित हूती समूह ने सऊदी अरब के खिलाफ ड्रोन और मिसाइल हमलों को तेज किया है। इससे पहले सऊदी क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे को भी निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। इस तरह अमेरिका-ईरान संघर्ष अब कई मोर्चों पर फैलता दिखाई दे रहा है।

सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि क्या दोनों देश इस जवाबी हमले के चक्र को रोक पाएंगे। अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि ईरानी हमलों का जवाब दिया जाएगा, जबकि ईरान भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों और समुद्री गतिविधियों को निशाना बनाने की क्षमता दिखा रहा है।

अगर किसी अमेरिकी युद्धपोत को गंभीर नुकसान पहुंचता है या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी बड़े वाणिज्यिक जहाज पर हमला होता है, तो स्थिति और तेजी से बिगड़ सकती है। इससे न सिर्फ मध्य पूर्व में व्यापक युद्ध का खतरा बढ़ेगा, बल्कि पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

फिलहाल पांच ईरानी तेल टैंकरों का अमेरिकी हमला और उसके बाद जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरानी मिसाइल हमला यह संकेत दे रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष अब बेहद संवेदनशील दौर में पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं या फिर सैन्य कार्रवाई का यह सिलसिला और आगे बढ़ता है—इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

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जितेन्द्र कुमार

जितेन्द्र कुमार उत्तर प्रदेश के हाथरस के रहने वाले एक भारतीय पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो वरिष्ठ पत्रकार और एक्सपर्ट टाइम्स नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक के रूप में जाने जाते हैं।

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