नई दिल्ली: जुलाई में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग के मामले में सुनवाई से पहले दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल किया है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संसद तक पैदल मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़कर बैरिकेड्स तोड़ दिए, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए न्यूनतम और जरूरी बल का इस्तेमाल किया गया।
संसद मार्च की नहीं थी अनुमति: दिल्ली पुलिस
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में दिल्ली पुलिस ने कहा कि छात्रों को संसद तक पैदल मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई थी। पुलिस के मुताबिक, इसके बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी आगे बढ़े और बैरिकेड्स तोड़ दिए।
पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। हालात बिगड़ने पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए परिस्थितियों के अनुरूप जरूरी कदम उठाए गए।
30 हजार लोगों की भीड़, 5 हजार पुलिसकर्मी तैनात
दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान करीब 30,000 लोग मौजूद थे। भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 5,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
पुलिस का दावा है कि जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ दिए और स्थिति बेकाबू होने लगी, तभी न्यूनतम और जरूरी बल का इस्तेमाल किया गया। दिल्ली पुलिस ने कहा कि उसका उद्देश्य केवल स्थिति को नियंत्रित करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।
झड़प में 240 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल
हलफनामे में दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में 240 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके अलावा करीब 200 आम नागरिक और छात्र भी घायल हुए।
पुलिस ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्व शामिल हो गए थे। उनके कारण प्रदर्शन के दौरान तनाव और बढ़ गया और स्थिति को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो गया।
सुप्रीम कोर्ट में होगी मामले की सुनवाई
दिल्ली पुलिस का हलफनामा ऐसे समय दाखिल किया गया है जब मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। अब अदालत में पुलिस के दावों और प्रदर्शन के दौरान कथित अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों पर सुनवाई होगी।
