डिजिटल युग में समाचार निर्माताओं को उचित पारिश्रमिक मिलना अनिवार्य: आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव

डिजिटल युग में समाचार निर्माताओं को उचित पारिश्रमिक मिलना अनिवार्य: आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव

Spread the love

डिजिटल क्रांति के इस दौर में जहां सूचना तक पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान हो गई है, वहीं समाचार उद्योग के सामने आर्थिक असंतुलन की चुनौती भी तेजी से बढ़ी है। इसी संदर्भ में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने स्पष्ट रूप से कहा है कि समाचार सामग्री तैयार करने वाले पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को उनके कार्य का उचित पारिश्रमिक मिलना ही चाहिए। उनका मानना है कि यदि कंटेंट क्रिएटर्स को न्यायसंगत आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा, तो लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर हो सकती है।

एक मीडिया और प्रौद्योगिकी सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि समाचार तैयार करना एक गंभीर और जिम्मेदार कार्य है। इसमें तथ्य जुटाना, सत्यापन करना, जमीनी रिपोर्टिंग करना और संपादकीय मानकों का पालन करना शामिल है। यह सब समय, संसाधन और विशेषज्ञता की मांग करता है। ऐसे में यदि डिजिटल प्लेटफॉर्म समाचार सामग्री का उपयोग कर राजस्व अर्जित करते हैं, तो उस आय का एक उचित हिस्सा सामग्री निर्माताओं तक पहुंचना चाहिए।

मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले एक दशक में मीडिया उद्योग का स्वरूप तेजी से बदला है। पारंपरिक प्रिंट और प्रसारण माध्यमों की तुलना में अब डिजिटल प्लेटफॉर्म समाचार वितरण का प्रमुख माध्यम बन गए हैं। विज्ञापन राजस्व, जो पहले समाचार पत्रों और चैनलों की आय का मुख्य स्रोत था, अब बड़ी तकनीकी कंपनियों की ओर स्थानांतरित हो चुका है। इससे कई समाचार संस्थान आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि Government of India इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है। सरकार का उद्देश्य तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना है, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करना भी है कि डिजिटल इकोसिस्टम में निष्पक्षता बनी रहे। मंत्री के अनुसार, समाचार सामग्री केवल एक व्यावसायिक उत्पाद नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यदि विश्वसनीय पत्रकारिता आर्थिक रूप से कमजोर होती है, तो फर्जी खबरों और भ्रामक सूचनाओं को बढ़ावा मिल सकता है। मजबूत और स्वतंत्र मीडिया ही समाज को सही दिशा दे सकता है। इसलिए समाचार निर्माताओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना समय की मांग है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश डिजिटल प्लेटफॉर्म और समाचार प्रकाशकों के बीच राजस्व साझेदारी को लेकर नीतियां बना रहे हैं। भारत भी इन मॉडलों का अध्ययन कर रहा है, ताकि देश की परिस्थितियों के अनुरूप एक संतुलित ढांचा तैयार किया जा सके। मंत्री ने कहा कि कोई भी कदम उठाने से पहले सभी हितधारकों—मीडिया संस्थानों, डिजिटल कंपनियों और नागरिक समाज—से व्यापक परामर्श किया जाएगा।

मीडिया जगत के प्रतिनिधियों ने मंत्री के बयान का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि डिजिटल प्लेटफॉर्म समाचार सामग्री से होने वाले लाभ का उचित हिस्सा प्रकाशकों के साथ साझा करें। विशेष रूप से छोटे और क्षेत्रीय समाचार पत्र, जिनकी आय के सीमित स्रोत हैं, इस बदलाव से सबसे अधिक लाभान्वित हो सकते हैं।

हालांकि, कुछ डिजिटल कंपनियों ने यह तर्क दिया है कि वे समाचार वेबसाइटों को पर्याप्त ट्रैफिक प्रदान करती हैं, जिससे उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से आय होती है। इस पर मंत्री ने कहा कि ट्रैफिक और वास्तविक राजस्व के बीच अंतर को समझना जरूरी है। केवल क्लिक या व्यूज़ पर्याप्त नहीं हैं; समाचार निर्माण की वास्तविक लागत को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

अश्विनी वैष्णव ने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम और कंटेंट वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाना आवश्यक है। यदि यह स्पष्ट नहीं होगा कि कौन-सी खबरें किस आधार पर अधिक दिखाई जा रही हैं, तो इससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। पारदर्शिता से विश्वास बढ़ेगा और सभी पक्षों के बीच संतुलन स्थापित होगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का उद्देश्य टकराव पैदा करना नहीं है, बल्कि सहयोग के माध्यम से समाधान निकालना है। भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और इस परिवर्तन में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि समाचार संस्थान मजबूत रहेंगे, तो लोकतंत्र भी सुदृढ़ रहेगा।

मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि सरकार संवाद के लिए प्रतिबद्ध है और एक ऐसा ढांचा तैयार किया जाएगा जो तकनीकी विकास और पत्रकारिता—दोनों के हितों की रक्षा करे। उन्होंने कहा, “नवाचार और निष्पक्षता साथ-साथ चल सकते हैं। हमें ऐसा डिजिटल वातावरण बनाना है जहां सृजनकर्ताओं को उनका उचित अधिकार मिले।”

डिजिटल युग में सूचना की शक्ति पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे समय में समाचार निर्माताओं को उचित पारिश्रमिक दिलाने की दिशा में उठाया गया हर कदम न केवल मीडिया उद्योग के लिए, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक तंत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

author

अंजली सिंह

अंजली सिंह उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद की एक भारतीय पत्रकार हैं। वे नई दिल्ली में रहती हैं।

संबंधित पोस्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *