सीहोर (मध्य प्रदेश): देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की है कि गांवों तक उन्नत बीजों की किस्में आसानी से पहुंचाने के लिए देशभर में ‘बीज ग्राम’ विकसित किए जाएंगे। यह पहल किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने, उत्पादन बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में सहायक होगी।
यह घोषणा मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा में आयोजित राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत राष्ट्र-स्तरीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन के दौरान की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने उन्नत कृषि तकनीकों और नई किस्मों के प्रदर्शन हेतु खेतों का भ्रमण किया तथा किसानों से सीधा संवाद भी किया।
सम्मेलन के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘बायोलॉजिकल सॉल्यूशंस: एडवांसिंग री-जेनेरेटिंग एग्रीकल्चर फॉर हेल्थ एंड एनवायरनमेंट’ और अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान आईसीएआरडीए की एक महत्वपूर्ण पुस्तक का विमोचन किया गया। साथ ही पल्स मिशन पोर्टल की लॉन्चिंग कर दलहन क्षेत्र में डिजिटल निगरानी और योजना निर्माण को गति दी गई। जैविक खेती और नवाचार में उत्कृष्ट योगदान देने वाले किसानों को सम्मानित भी किया गया।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य विकसित और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण है, जिसमें दलहन उत्पादन की आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दालों का आयात देश की मजबूरी नहीं बनना चाहिए। इसके लिए फसल विविधीकरण पर जोर देते हुए चना, मसूर, उड़द और तुअर जैसी फसलों के उत्पादन को बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश दलहन उत्पादन में देश में अग्रणी है, लेकिन क्षेत्रफल में आई कमी चिंता का विषय है। इसे दूर करने के लिए अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से मौसम और रोग प्रतिरोधक उन्नत बीज विकसित किए जा रहे हैं। बीज वितरण के लिए क्लस्टर बनाए जाएंगे और आदर्श खेती अपनाने पर प्रति हेक्टेयर 10 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी घोषणा की कि देश में 1000 नई दाल मिलें स्थापित की जाएंगी, जिनमें से 55 मध्य प्रदेश में लगेंगी। सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दालों की खरीद के लिए प्रतिबद्ध है—तुअर 8000 रुपये, उड़द 7800 रुपये, चना 5875 रुपये और मसूर 7000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी जाएगी। “बीज से लेकर बाजार तक” किसानों की जिम्मेदारी सरकार निभाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में अन्न और दाल का विशेष महत्व है। उन्होंने दलहन-तिलहन मिशन के तहत राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए बताया कि भावांतर योजना के माध्यम से किसानों को अब तक 1500 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा चुकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयासों से भारत दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
