SIR विवाद पर दिल्ली से बेंगलुरु तक तेज हुआ विरोध, ध्रुव राठी और अभिजीत दिपके ने संभाला मोर्चा

SIR विवाद पर दिल्ली से बेंगलुरु तक तेज हुआ विरोध, ध्रुव राठी और अभिजीत दिपके ने संभाला मोर्चा

बेंगलुरु: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। एक तरफ दिल्ली में विपक्षी दलों के नेता चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ बेंगलुरु में SIR के खिलाफ एक ‘People’s Tribunal’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में YouTuber और राजनीतिक टिप्पणीकार ध्रुव राठी, Cockroach Janta Party के संस्थापक अभिजीत दिपके और अभिनेता-कार्यकर्ता प्रकाश राज जैसे चर्चित चेहरे शामिल हुए।

बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन लोगों की बातें सामने लाना था, जो दावा कर रहे हैं कि SIR प्रक्रिया के दौरान उनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए या उन्हें मतदान के अधिकार को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ा। आयोजकों का कहना है कि अलग-अलग इलाकों से आए लोगों को अपनी शिकायतें सार्वजनिक रूप से रखने का अवसर दिया गया।

People’s Tribunal को एक औपचारिक न्यायिक अदालत के बजाय एक सार्वजनिक मंच के रूप में आयोजित किया गया, जहां नागरिकों से उनकी व्यक्तिगत समस्याएं और अनुभव सुने गए। आयोजकों ने कहा कि उनका मकसद चुनावी प्रक्रिया के खिलाफ केवल राजनीतिक बयान देना नहीं, बल्कि उन लोगों की आवाज सामने लाना है जिन्हें कथित तौर पर मतदाता सूची में बदलाव के कारण परेशानी हुई है।

ध्रुव राठी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस कार्यक्रम में अपनी भागीदारी की पुष्टि की थी। वहीं प्रकाश राज ने भी लोगों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की। कार्यक्रम के आयोजकों का दावा है कि SIR से जुड़े मामलों को सामने लाकर वे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों पर सार्वजनिक चर्चा को मजबूत करना चाहते हैं।

बेंगलुरु में यह कार्यक्रम ऐसे समय हुआ जब दिल्ली में SIR को लेकर राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन तेज कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

बुधवार को दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े तीन और FIR दर्ज किए। पुलिस के अनुसार, इन मामलों में पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट, सरकारी काम में बाधा, धक्का-मुक्की और दुर्व्यवहार जैसे आरोप शामिल हैं। FIR में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के नाम भी सामने आए हैं।

इससे पहले मंगलवार को भी राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों के खिलाफ आकाशवाणी भवन परिसर में कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश करने को लेकर मामला दर्ज किया गया था। विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि वह मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

राहुल गांधी ने भी FIR को लेकर सरकार और पुलिस पर निशाना साधते हुए कहा है कि ऐसे मामले उन्हें आंदोलन से पीछे नहीं हटाएंगे। कांग्रेस का कहना है कि उसका विरोध लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदाता सूची की पारदर्शिता से जुड़े सवालों को लेकर है।

वहीं प्रशासन और चुनावी अधिकारियों की ओर से यह तर्क दिया जाता रहा है कि मतदाता सूची को अपडेट करना चुनावी प्रक्रिया का नियमित हिस्सा है और योग्य मतदाताओं को दावे तथा आपत्तियां दर्ज कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया उपलब्ध है।

SIR को लेकर चल रहा विवाद अब केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रह गया है। बेंगलुरु में आयोजित People’s Tribunal में सामाजिक कार्यकर्ताओं, सार्वजनिक हस्तियों और नागरिकों की भागीदारी यह संकेत देती है कि मतदाता सूची और चुनावी अधिकारों का मुद्दा व्यापक सार्वजनिक बहस का विषय बन रहा है।

दिल्ली में FIR और हिरासत की घटनाओं तथा बेंगलुरु में नागरिक मंच के आयोजन ने SIR विवाद को एक नया राजनीतिक आयाम दे दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक चर्चा में रहने की संभावना है, क्योंकि विपक्षी दल जहां आंदोलन जारी रखने की बात कर रहे हैं, वहीं चुनावी संस्थाओं के सामने मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की चुनौती बनी हुई है।

फिलहाल SIR को लेकर देश में दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाई दे रही हैं—एक तरफ सड़कों पर विपक्ष का विरोध और दूसरी तरफ नागरिक मंचों के जरिए मतदाताओं की शिकायतों को सामने लाने की कोशिश। यही वजह है कि आने वाले दिनों में यह विवाद राजनीतिक और चुनावी दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना रह सकता है।

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जितेन्द्र कुमार

जितेन्द्र कुमार उत्तर प्रदेश के हाथरस के रहने वाले एक भारतीय पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो वरिष्ठ पत्रकार और एक्सपर्ट टाइम्स नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक के रूप में जाने जाते हैं।

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