नई दिल्ली: बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय लोकसभा सांसद पप्पू यादव ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित विधेयक में पेपर लीक कराने वाले माफियाओं पर प्रभावी कार्रवाई का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
संसद में बोलते हुए पप्पू यादव ने कहा कि सरकार को चीन, जापान, फिनलैंड और सिंगापुर जैसे देशों की परीक्षा व्यवस्था से सीख लेकर पेपर लीक रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने NTA को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे “माफिया एजेंसी” बताया।
NTA की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
पप्पू यादव ने दावा किया कि वर्ष 2026 तक NTA में केवल 24 अधिकारी कार्यरत थे, जबकि यह संस्था करोड़ों छात्रों की परीक्षाएं आयोजित करती है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी सीमित अधिकारियों के साथ कैसे निभाई जा रही है और एक ही अधिकारियों को बार-बार महत्वपूर्ण पदों पर क्यों नियुक्त किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि NTA की कार्यप्रणाली के कारण कई छात्र मानसिक तनाव और अवसाद का सामना कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने पूछा कि परीक्षा में गड़बड़ियों की जवाबदेही किसकी तय होगी और NTA के चेयरमैन के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
पेपर लीक मामलों पर भी साधा निशाना
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि पेपर लीक के मामलों में कार्रवाई केवल निचले स्तर तक सीमित रहती है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां “छोटी मछलियों” पर कार्रवाई करती हैं, जबकि बड़े स्तर पर जिम्मेदारी तय नहीं होती।
उन्होंने यह भी कहा कि NEET पेपर लीक मामले में कई केस दर्ज हुए, लेकिन अधिकांश मामलों में दोषसिद्धि नहीं हो सकी। उनके अनुसार, बार-बार नई समितियां बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है।
लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर संसद में चर्चा के दौरान पप्पू यादव के इन बयानों के बाद परीक्षा प्रणाली और NTA की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
