रांची छात्र आंदोलन का 12वां दिन: सोनम वांगचुक ने तुड़वाया अनशन, अभिजीत दिपके ने भी दिया समर्थन

रांची छात्र आंदोलन का 12वां दिन: सोनम वांगचुक ने तुड़वाया अनशन, अभिजीत दिपके ने भी दिया समर्थन

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। विरोध प्रदर्शन और अनशन अब 12वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस बीच, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दिपके ने भी आंदोलन का समर्थन किया है।

आंदोलन के 12वें दिन सोनम वांगचुक ने अनशन पर बैठे देवेंद्र महतो से बातचीत की और उनका अनशन तुड़वाया। वांगचुक ने उन्हें सलाह दी कि वे केवल पानी पीकर आंदोलन जारी रखें, ताकि लंबे समय तक अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर सकें। वहीं, अभिजीत दिपके ने भी छात्रों के आंदोलन में शामिल होने की बात कही है।

कैसे शुरू हुआ आंदोलन?

रांची में छात्र आंदोलन की शुरुआत 4 जुलाई 2026 को हुई, जब अभ्यर्थियों ने मोराबादी स्थित झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) कार्यालय के बाहर 14वीं सिविल सेवा परीक्षा और अन्य भर्ती प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में प्रदर्शन शुरू किया।

22 जुलाई को JPSC परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन और तेज हो गया। भारतीय जनता पार्टी और विभिन्न युवा संगठनों ने भी JPSC कार्यालय के बाहर धरना देकर CBI जांच की मांग की। इसी दौरान JPSC ने अपनी 9 भर्ती परीक्षाएं स्थगित कर दीं, जिससे विवाद और बढ़ गया।

सत्याग्रह से विधानसभा मार्च तक

25 जुलाई से JPSC-JSSC अभ्यर्थियों ने न्याय मंच के बैनर तले मोराबादी मैदान की बापू वाटिका में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू किया। 28 और 29 जुलाई को हजारों छात्रों ने रांची में विरोध मार्च निकाला। 30 जुलाई तक आंदोलन राज्यव्यापी रूप ले चुका था और अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा, CBI/ED जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई।

इसके बाद 31 जुलाई और 1 अगस्त को सत्याग्रह जारी रहा और छात्रों ने 6 अगस्त को विधानसभा मार्च निकालने का ऐलान किया। 3 अगस्तसे आंदोलन को अन्य राज्यों के नेताओं और विभिन्न संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया।

मुख्यमंत्री ने दिया निष्पक्ष जांच का भरोसा

4 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार इस मामले को “बहुत गंभीरता” से ले रही है और कानून के दायरे में निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।

छात्रों की प्रमुख मांगें

अभ्यर्थियों का आरोप है कि 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि कट-ऑफ तय करने में गड़बड़ी की गई, मेरिट सूची पर जिम्मेदार अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं हैं, OMR शीट में छेड़छाड़ हुई है और ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL को परीक्षा का ठेका दिया गया।

छात्रों का CID जांच पर भरोसा नहीं है और वे CBI या किसी अन्य केंद्रीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा अभ्यर्थियों ने OMR शीट में ‘Not Attempted’ का पांचवां विकल्प जोड़ने की मांग भी उठाई है।

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