डॉक्टर बनने का था सपना, छात्र राजनीति से जेल तक पहुंचे, फिर ऐसे बने कालीन भैया

डॉक्टर बनने का था सपना, छात्र राजनीति से जेल तक पहुंचे, फिर ऐसे बने कालीन भैया

मुंबई: हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार रहे हैं, जिन्होंने साइड और सपोर्टिंग रोल से शुरुआत कर अपनी अलग पहचान बनाई। इस फेहरिस्त में पंकज त्रिपाठी का नाम आज सबसे खास माना जाता है। अपनी दमदार अदाकारी और सहज अभिनय से उन्होंने बॉलीवुड से लेकर ओटीटी तक दर्शकों के दिल में खास जगह बनाई है।

पंकज त्रिपाठी का सफर हालांकि इतना आसान नहीं रहा। गरीबी में बीता बचपन, डॉक्टर बनने का दबाव, छात्र राजनीति और फिर थिएटर से अभिनय की दुनिया तक पहुंचने की उनकी कहानी संघर्ष और जुनून से भरी है। आज अभिनेता अपना 50वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर जानते हैं उनके जीवन और फिल्मी सफर से जुड़ी खास बातें।

बिहार के छोटे से गांव में हुआ जन्म

पंकज त्रिपाठी का जन्म 5 सितंबर 1976 को बिहार के गोपालगंज जिले के बेलसंड गांव में हुआ था। आज वह अपनी जिंदगी के पांच दशक पूरे कर चुके हैं।

उनका असली सरनेम तिवारी था। बताया जाता है कि 10वीं कक्षा के दौरान उन्होंने अपना सरनेम तिवारी से बदलकर त्रिपाठी कर लिया था।

पिता चाहते थे बेटा बने डॉक्टर

पंकज त्रिपाठी के पिता चाहते थे कि उनका बेटा पढ़-लिखकर डॉक्टर बने और लोगों की सेवा करे। पिता की इच्छा का सम्मान करते हुए पंकज डॉक्टर की पढ़ाई के लिए पटना आ गए।

हालांकि पढ़ाई के दौरान उनका मन डॉक्टर बनने में नहीं लगा। इसी दौरान उनका झुकाव छात्र राजनीति की ओर हो गया।

ABVP से जुड़े, छात्र राजनीति में रहे सक्रिय

कॉलेज के दिनों में पंकज त्रिपाठी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। अभिनेता ने अपने पुराने इंटरव्यू में बताया था कि उस दौर में उनके अंदर कुछ अलग करने और अपनी पहचान बनाने की इच्छा थी।

छात्र राजनीति के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। हालांकि कुछ समय बाद राजनीति से भी उनका मन हटने लगा और उनकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया।

एक नाटक देखने के बाद एक्टिंग का फैसला

पंकज त्रिपाठी के अभिनय की दुनिया में आने के पीछे एक दिलचस्प किस्सा है। वह एक बार अपने दोस्त के साथ ‘अंधा कुआं’ नाम का नाटक देखने गए थे। नाटक देखने के बाद उनके मन में अभिनय को करियर बनाने का विचार मजबूत हो गया।

इसके बाद उन्होंने तय कर लिया कि अब उन्हें एक्टिंग की दुनिया में ही आगे बढ़ना है।

पटना में थिएटर से शुरू हुआ सफर

पटना में रहते हुए पंकज ने लगातार थिएटर किया और कई नाटकों में काम किया। धीरे-धीरे उनके अभिनय को लोगों की सराहना मिलने लगी।

उन्होंने 1995 से 2001 तक पटना में थिएटर किया। इसके बाद फिल्मों में काम करने का सपना लेकर साल 2004 में मुंबई पहुंच गए।

मुंबई में 6 साल तक नहीं मिली कमाई

मुंबई पहुंचने के बाद पंकज त्रिपाठी के लिए संघर्ष का लंबा दौर शुरू हुआ। काम की तलाश में वह लगातार प्रोडक्शन हाउस और लोगों के चक्कर लगाते रहे।

अभिनेता के मुताबिक, 2004 से 2010 के बीच उन्होंने कुछ नहीं कमाया। इस मुश्किल समय में उनकी पत्नी मृदुला त्रिपाठी ने घर संभाला।

पंकज ने अपने संघर्ष को याद करते हुए बताया था कि वह अंधेरी की सड़कों पर घूमते रहते थे और लोगों से कहते थे कि उनसे एक्टिंग करवा लो।

‘रन’ से मिला पहला फिल्मी मौका

पंकज त्रिपाठी ने अमिताभ बच्चन और भूमिका चावला की साल 2004 में आई फिल्म ‘रन’ में एक छोटा सा रोल किया था। हालांकि उन्हें असली पहचान मिलने में कुछ और साल लगे।

साल 2012 में ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। फिल्म में उन्होंने सुल्तान कुरैशी का किरदार निभाया और अपनी अदाकारी से दर्शकों का ध्यान खींच लिया।

‘मसान’ से ‘मिमी’ तक, हर किरदार में छोड़ी छाप

‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के बाद पंकज त्रिपाठी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने ‘मसान’, ‘न्यूटन’, ‘बरेली की बर्फी’, ‘मिमी’ और ‘ओएमजी 2’जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी अभिनय क्षमता साबित की।

उनकी खासियत यह रही कि चाहे किरदार छोटा हो या बड़ा, वह अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से उसे यादगार बना देते हैं।

‘मिर्जापुर’ के कालीन भैया ने बनाया ओटीटी स्टार

साल 2018 में ‘मिर्जापुर’ वेब सीरीज से पंकज त्रिपाठी ने ओटीटी की दुनिया में कदम रखा। सीरीज में कालीन भैया के किरदार ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया।

कालीन भैया के तेवर, संवाद और अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया। ‘मिर्जापुर’ के हर सीजन के साथ पंकज त्रिपाठी की लोकप्रियता और बढ़ती गई।

इसके अलावा उन्होंने ‘क्रिमिनल जस्टिस’ और ‘सेक्रेड गेम्स’ जैसी चर्चित वेब सीरीज में भी शानदार अभिनय किया।

संघर्ष से सफलता तक प्रेरणादायक सफर

पंकज त्रिपाठी की कहानी उन कलाकारों के लिए प्रेरणा है, जो बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर पहचान बनाना चाहते हैं। डॉक्टर बनने से लेकर छात्र राजनीति और थिएटर के रास्ते बॉलीवुड और ओटीटी के सबसे चर्चित कलाकारों में शामिल होने तक उनका सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है।

आज पंकज त्रिपाठी सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि अपने दम पर पहचान बनाने वाले कलाकारों की मिसाल बन चुके हैं।

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