मुंबई के कुर्ला में भारी बारिश के बाद भूस्खलन, 5 की मौत और 6 घायल

मुंबई के कुर्ला में भारी बारिश के बाद भूस्खलन, 5 की मौत और 6 घायल

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मुंबई में भारी बारिश के बीच कुर्ला इलाके में हुए भूस्खलन ने एक बार फिर शहर के मानसून प्रबंधन और संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुर्ला के चिराग नगर स्थित गौसिया चॉल इलाके में बुधवार तड़के भूस्खलन की घटना सामने आई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि छह लोग घायल हुए। बाद की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या बढ़कर छह होने की जानकारी सामने आई। राहत और बचाव दल लगातार मलबे की जांच करते रहे और प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया।

बताया गया कि यह हादसा सुबह करीब 3:48 बजे हुआ, जब ज्यादातर लोग अपने घरों में सो रहे थे। अचानक हुए भूस्खलन के कारण इलाके में अफरा-तफरी मच गई। भारी बारिश के कारण जमीन पहले से ही गीली और कमजोर हो चुकी थी। ऐसे में मिट्टी और मलबा अचानक खिसकने से आसपास मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

घटना की जानकारी मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचावकर्मियों ने मलबे को हटाने का काम शुरू किया और यह पता लगाने की कोशिश की कि कहीं कोई व्यक्ति मलबे के नीचे फंसा तो नहीं है। लगातार बारिश और जमीन के अस्थिर होने के कारण राहत कार्य आसान नहीं था। बचाव दल को बेहद सावधानी के साथ अभियान चलाना पड़ा, क्योंकि मलबे के दोबारा खिसकने का खतरा बना हुआ था।

घायल लोगों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में ले जाया गया। वहीं, हादसे के बाद आसपास के लोगों में भी डर का माहौल दिखाई दिया। कई लोग अपने रिश्तेदारों और परिचितों की जानकारी लेने के लिए घटनास्थल तथा अस्पतालों के बाहर पहुंच गए।

मुंबई में मानसून के दौरान भारी बारिश कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब बारिश बेहद तेज हो जाती है तो इसका असर शहर के कमजोर और संवेदनशील इलाकों पर ज्यादा पड़ता है। लगातार बारिश के कारण मिट्टी में पानी की मात्रा बढ़ जाती है और ढलान वाले इलाकों में जमीन की पकड़ कमजोर हो सकती है। ऐसी स्थिति में भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है।

कुर्ला की इस घटना ने शहर में उन इलाकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है, जहां बड़ी संख्या में लोग घनी बस्तियों में रहते हैं। ऐसे इलाकों में घर एक-दूसरे के बेहद करीब होते हैं और कई जगहों पर आपातकालीन वाहनों के पहुंचने के लिए पर्याप्त रास्ता भी नहीं होता। किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में यह चुनौती और बड़ी हो जाती है।

हादसे के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या प्रभावित क्षेत्र पहले से ही भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील था और क्या वहां रहने वाले लोगों को किसी तरह की चेतावनी दी गई थी। प्रशासन के सामने अब सिर्फ राहत और बचाव का काम ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की चुनौती भी है।

मुंबई में हर साल मानसून से पहले संवेदनशील इलाकों की पहचान, नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और खतरनाक ढलानों की निगरानी जैसे कदम उठाए जाते हैं। लेकिन अत्यधिक बारिश के दौरान इन व्यवस्थाओं की क्षमता की भी परीक्षा होती है।

कुर्ला की घटना यह बताती है कि सिर्फ बारिश से निपटने की तैयारी पर्याप्त नहीं है। शहर को भूस्खलन, जलभराव, कमजोर इमारतों और अन्य मानसूनी खतरों से एक साथ निपटने की रणनीति बनानी होगी। खासतौर पर उन इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए पहले से चेतावनी और सुरक्षित स्थानों की व्यवस्था जरूरी है।

घटना के दौरान सामने आए आंकड़ों में भी बदलाव हुआ। शुरुआती जानकारी में पांच लोगों की मौत और छह लोगों के घायल होने की बात सामने आई थी, जबकि बाद की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या छह बताई गई। ऐसी घटनाओं में राहत अभियान के दौरान आंकड़े बदल सकते हैं क्योंकि प्रशासन को पीड़ितों की पहचान और स्थिति की पुष्टि करने में समय लगता है।

फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रभावित परिवारों की मदद करना और इलाके में किसी अन्य खतरे को रोकना है। बचाव दलों की कार्रवाई के बाद प्रशासन को घटनास्थल की विस्तृत जांच करनी होगी। यह भी देखना होगा कि भूस्खलन के पीछे केवल भारी बारिश जिम्मेदार थी या जमीन की स्थिति, जल निकासी और अन्य स्थानीय कारणों ने भी भूमिका निभाई।

कुर्ला का यह हादसा मुंबई के लिए एक गंभीर चेतावनी है। मानसून के दौरान तेज बारिश कुछ ही मिनटों में सामान्य स्थिति को आपदा में बदल सकती है। ऐसे में संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी, बेहतर जल निकासी, समय पर चेतावनी और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना बेहद जरूरी है। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए यह नुकसान कभी न भर पाने वाला है, जबकि प्रशासन के लिए यह घटना भविष्य की तैयारियों को और मजबूत करने का एक बड़ा सबक है।

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जितेन्द्र कुमार

जितेन्द्र कुमार उत्तर प्रदेश के हाथरस के रहने वाले एक भारतीय पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो वरिष्ठ पत्रकार और एक्सपर्ट टाइम्स नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक के रूप में जाने जाते हैं।

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