रांची: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन बुधवार को 20वें दिन भी जारी रहा। छात्रों और सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन पाई है।
छात्रों और सरकार के बीच बातचीत के बाद भी आंदोलन खत्म नहीं होने से सवाल उठ रहा है कि आखिर दोनों पक्षों के बीच बात कहां अटक गई है। छात्रों ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर विधानसभा का घेराव भी किया है।
सरकार ने बनाई मंत्रियों की समिति
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की मांगों पर बातचीत के लिए मंत्रियों की एक समिति गठित की है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर समिति ने छात्रों के साथ सीधे संवाद के कई दौर किए हैं। सरकार का कहना है कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से लिया जा रहा है और जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रदर्शन के 16वें दिन यानी 9 अगस्त को सरकार और छात्रों के बीच तीसरे दौर की बातचीत हुई थी। हालांकि, इस बैठक में भी सभी मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी।
CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र
छात्र JPSC में कथित धांधली की जांच CBI से कराने की मांग पर अड़े हुए हैं। इसके अलावा छात्र ED या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की निगरानी में जांच कराने की मांग भी कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि सरकार को इन मांगों को स्वीकार करना होगा।
वहीं, सरकार की ओर से गठित चार मंत्रियों के समूह ने बातचीत के बाद आम सहमति नहीं बन पाने पर निराशा जताई है।
सरकार का दावा- अधिकांश मांगें मानी गईं
सूचना भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रतिनिधिमंडल में शामिल उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्या कुमार सोनू ने कहा कि सरकार ने छात्रों की अधिकांश मांगों को स्वीकार कर लिया है, लेकिन इसके बावजूद छात्र आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं।
सरकार के मुताबिक, 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और 2023-2025 की सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े लंबित मामलों को रद्द करने पर सहमति बनी है।
इसके अलावा परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं के वित्तीय पहलुओं की जांच में ED को CID के साथ शामिल करने की सिफारिश करने पर भी सरकार सहमत हुई है।
सरकार के प्रतिनिधियों के अनुसार, विवादित एजेंसी TDPL द्वारा आयोजित अन्य परीक्षाओं की भी व्यापक जांच की जाएगी। अगर जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
CGL परीक्षा रद्द करने पर सरकार का अलग रुख
छात्रों की CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर सरकार ने कहा है कि यह परीक्षा सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार आयोजित की गई थी। इसके आधार पर नियुक्तियां भी हो चुकी हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द करना सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में मामले की जांच कराने का प्रस्ताव भी रखा, लेकिन छात्रों ने इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं जताई।
फिलहाल रांची में छात्रों का आंदोलन जारी है। कई दौर की बातचीत के बावजूद सरकार और छात्रों के बीच प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन पाई है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच गतिरोध कब और किस तरह खत्म होता है।
