नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जल्द ही 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक यानी पॉलीमर नोटों को बाजार में लाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके लिए पॉलीमर सब्सट्रेट शीट की सप्लाई को लेकर भारतीय और विदेशी कंपनियों ने बोली लगाई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, RBI की सब्सिडियरी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने इनबिल्ट सिक्योरिटी फीचर्स वाली पॉलीमर सब्सट्रेट शीट की सप्लाई के लिए ग्लोबल एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया था। इसकी डेडलाइन 18 अगस्त 2026 थी।
करीब 200 करोड़ प्लास्टिक नोट छापने की तैयारी
रिपोर्ट में बताया गया है कि RBI कुल करीब 200 करोड़ पॉलीमर नोट छापने की तैयारी कर रहा है। शुरुआती चरण में 10 और 20 रुपये के नोटों के लिए पॉलीमर सब्सट्रेट की व्यवस्था की जा रही है।
पॉलीमर नोट सामान्य कागज के नोटों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ माने जाते हैं। इनमें सिक्योरिटी फीचर्स को भी शामिल किया जा सकता है, जिससे नकली नोटों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
भारतीय और विदेशी कंपनियों ने लगाई बोली
BRBNMPL की ओर से जारी EOI के जवाब में कम से कम दो विदेशी पॉलीमर करेंसी कंपनियों के साथ UK की बैंकनोट कंपनी डी ला रू (De La Rue) के साथ साझेदारी करने वाली एक भारतीय सब्सट्रेट निर्माता कंपनी ने भी बोली लगाई है।
इन कंपनियों को कई तरह के दस्तावेज और समझौते देने होंगे। इनमें सत्यनिष्ठा समझौता, गोपनीयता अनुबंध और एजेंट-मुक्त समझौता शामिल हैं।
चीन और पाकिस्तान से अलग रखना होगा कारोबार
पॉलीमर बैंकनोट की आपूर्ति को संवेदनशील मामला मानते हुए बोली लगाने वाली कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भारत में उनका संचालन चीन और पाकिस्तान में मौजूद उनके संचालन से पूरी तरह अलग रहे।
इसके अलावा कंपनियों को यह प्रमाणित करना होगा कि BRBNMPL को सप्लाई किए जाने वाले पॉलीमर सब्सट्रेट में जानवरों की चर्बी या उसका DNA मौजूद नहीं होगा।
अलग-अलग मौसम में होगी पॉलीमर शीट की टेस्टिंग
BRBNMPL को भारतीय बैंकनोटों की छपाई के लिए करीब 68,000 रीम पॉलीमर सब्सट्रेट की जरूरत बताई गई है। एक रीम में पॉलीमर फिल्म की 500 शीट होंगी।
बोली लगाने वाली कंपनियों को अपने सैंपल भी जमा करने होंगे। इन सैंपल की देश के अलग-अलग मौसम वाले इलाकों में टेस्टिंग की जाएगी। जो सैंपल जरूरी मानकों पर खरे उतरेंगे, उन्हें आगे BRBNMPL के फाइनल टेंडर में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाएगी।
कॉस्मो फर्स्ट भी दौड़ में शामिल
रिपोर्ट के अनुसार, पॉलीमर सब्सट्रेट की सप्लाई के लिए बोली लगाने वालों में कॉस्मो फर्स्ट भी शामिल है। यह BOPP यानी बायएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन का प्रमुख भारतीय निर्यातक है और De La Rue के बड़े सप्लायर्स में से एक बताया जाता है।
De La Rue का कहना है कि उसने कई देशों को पॉलीमर बैंकनोट अपनाने में मदद की है। कंपनी पॉलीमर करेंसी को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाला विकल्प बताती है।
क्या अभी से प्लास्टिक नोट बाजार में आएंगे?
फिलहाल इसे बाजार में नोटों की तत्काल उपलब्धता का ऐलान नहीं माना जाना चाहिए। अभी पॉलीमर सब्सट्रेट की सप्लाई के लिए क्वालिफाइंग प्रक्रिया चल रही है। सैंपल की टेस्टिंग और आगे की टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नोटों की छपाई और बाजार में उनकी उपलब्धता की दिशा स्पष्ट होगी।अगर यह प्रक्रिया सफल रहती है तो आने वाले समय में 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोट भारतीय करेंसी सिस्टम का हिस्सा बन सकते हैं।
