नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिजनों से जुड़ी कंपनियों को कथित रूप से सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के ठेकों में पक्षपातपूर्ण लाभ पहुंचाने के आरोपों की सीबीआई जांच को लेकर सियासत तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई द्वारा राज्य सरकार पर जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाए जाने के बाद कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पेमा खांडू और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है।
कांग्रेस ने साधा केंद्र और मुख्यमंत्री पर निशाना
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू का पद पर बने रहना सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही और पारदर्शिता के दावों पर सवाल खड़े करता है। पार्टी ने कहा कि मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य के मुख्य सचिव को तलब किया जाना बेहद गंभीर घटनाक्रम है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि 6 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सीबीआई जांच का आदेश दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस विभाग से जुड़े ठेकों की जांच हो रही है, उसके मंत्री स्वयं मुख्यमंत्री पेमा खांडू हैं, इसलिए उन्हें नैतिक आधार पर पद छोड़ देना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव और गृह सचिव को भेजा नोटिस
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने बताया कि प्रारंभिक जांच के दौरान अरुणाचल प्रदेश सरकार आवश्यक दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में सहयोग नहीं कर रही है।
सीबीआई की स्थिति रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राज्य के मुख्य सचिव और प्रधान सचिव (गृह) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
क्या है पूरा मामला?
मामला अरुणाचल प्रदेश में सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के ठेकों के कथित पक्षपातपूर्ण आवंटन से जुड़ा है। आरोप है कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाली या उनसे संबंधित बताई जा रही कंपनियों को सरकारी निर्माण कार्यों के ठेके अनुचित तरीके से दिए गए।
6 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सीबीआई को दो सप्ताह के भीतर प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद सीबीआई ने जांच शुरू की, लेकिन अब एजेंसी ने अदालत को बताया है कि राज्य सरकार की ओर से आवश्यक सहयोग नहीं मिल रहा है।
फिलहाल मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जारी है और राज्य सरकार से जवाब मांगा गया है। अदालत के आगामी निर्देशों के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।
