नई दिल्ली: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बातचीत में अपनी जिंदगी, बचपन, शादी और आज की युवा पीढ़ी को लेकर खुलकर बात की। इस दौरान उन्होंने Gen-Z के व्यवहार, सोशल मीडिया की आदतों और युवाओं की देश के प्रति भूमिका पर भी अपनी राय रखी।
‘इस देश को युवाओं ने आजाद करवाया’
Gen-Z को लेकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भारत को आजाद कराने में युवाओं की बड़ी भूमिका रही है और देश की रक्षा से लेकर भविष्य तक युवाओं के हाथ में है।
उन्होंने कहा, “इस देश को युवाओं ने आजाद करवाया है। इस देश की रक्षा भी युवाओं के हाथ में है। जवानों को भी हम जवान ही कहते हैं, देश के जवान। देश का भविष्य भी युवा है।”
‘जोश में रहें, लेकिन होश न खोएं’
बाबा बागेश्वर ने कहा कि युवाओं के लिए अपनी बात रखना जरूरी है। उन्होंने Gen-Z की तेज गति और सोच को लेकर कहा कि युवाओं की गति में प्रगति की संभावना है, लेकिन उन्हें संतुलन बनाए रखना होगा।
उन्होंने कहा, “हमें गति में तो रहना है, जोश में तो रहना है मगर होश नहीं खोना है। क्रोध में तो रहना है लेकिन बोध नहीं खोना है।”
उन्होंने युवाओं को नए विचार अपनाने के साथ अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़े रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विचार नए हो सकते हैं, लेकिन संस्कार पुराने और मजबूत नजर आने चाहिए।
आंदोलन करें, लेकिन देश प्रभावित नहीं होना चाहिए
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि युवाओं को अपनी बात रखने के नए तरीके अपनाने चाहिए। प्रदर्शन, आंदोलन, भूख हड़ताल या कामकाज की हड़ताल जैसे लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखी जा सकती है, लेकिन इससे देश की स्थिति प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे लोगों के हाथों की कठपुतली नहीं बनना चाहिए जो देश में फूट पैदा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी गतिविधि से विदेशियों को देश के खिलाफ माहौल बनाने का मौका नहीं मिलना चाहिए।
‘युवा ड्रग एडिक्ट नहीं, स्मार्टफोन एडिक्ट हो गए हैं’
बाबा बागेश्वर ने आज की युवा पीढ़ी की डिजिटल आदतों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युवा केवल ड्रग्स के आदी नहीं हुए हैं, बल्कि स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और डेटा के भी एडिक्ट हो गए हैं।
उन्होंने कहा, “इस युवा पीढ़ी के अंदर दिक्कत ये आई कि ये वर्ल्ड से कनेक्ट हो गए, बस खुद से डिसकनेक्ट हो गए।”
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि युवा पूरी दुनिया से जुड़ चुके हैं, लेकिन इसी दौरान वे अपने परिवार और संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने युवाओं से आधुनिकता के साथ अपनी जड़ों, परिवार और भारतीय संस्कारों से जुड़े रहने की अपील की।
