नई दिल्ली: रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे, घायल हुए और जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के परिवारों को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कई अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने विदेश मंत्रालय (MEA) को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने, शवों की पहचान के लिए अनिवार्य डीएनए परीक्षण कराने और प्रभावित परिवारों को आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि युद्ध क्षेत्र में मृत भारतीय नागरिकों के पार्थिव अवशेष उनके परिजनों को सौंपने से पहले डीएनए मिलान कराया जाए, ताकि पहचान पूरी तरह सुनिश्चित हो सके।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि:
- विदेश मंत्रालय एक नोडल अधिकारी नियुक्त करे।
- नोडल अधिकारी का संपर्क विवरण सभी प्रभावित परिवारों के साथ साझा किया जाए।
- मृत भारतीय नागरिकों के शवों की पहचान डीएनए मिलान के आधार पर की जाए।
- डीएनए प्रमाणन के बाद ही पार्थिव अवशेष परिजनों को सौंपे जाएं।
- रूसी अधिकारियों से मुआवजा प्राप्त करने की प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों का भारतीय भाषाओं में अनुवाद कर परिवारों को उपलब्ध कराया जाए।
- मुआवजा प्रक्रिया के कारण शवों को भारत लाने या अंतिम संस्कार में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
- राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (Legal Services Authority) प्रभावित परिवारों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराए।
क्या है पूरा मामला?
याचिका दायर करने वाले 26 लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उनके परिवार के सदस्य टूरिस्ट, स्टूडेंट या अन्य वैध वीजा पर रूस गए थे। उनका आरोप है कि भर्ती एजेंटों ने उन्हें बेहतर नौकरी का झांसा दिया, लेकिन रूस पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उन्हें कथित तौर पर रूसी सेना में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कुछ समय तक उनके परिजन संपर्क में रहे, लेकिन बाद में उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल को केंद्र सरकार से जवाब मांगा था।
केंद्र सरकार ने क्या बताया?
केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि अब तक लगभग 217 भारतीय नागरिक रूसी सेना में शामिल हुए थे।
सरकार के अनुसार:
- 49 भारतीय नागरिकों की मृत्यु हो चुकी है।
- 6 भारतीय नागरिक लापता हैं।
- भारतीय दूतावास के प्रयासों से 139 नागरिकों को सैन्य अनुबंध से मुक्त कराकर भारत वापस लाया जा चुका है।
शवों की पहचान को लेकर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कहा कि कुछ शव बेहद क्षत-विक्षत अवस्था में मिले, जिससे परिवारों को गहरा मानसिक आघात पहुंचा है।
इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि शवों की स्थिति के लिए भारत सरकार जिम्मेदार नहीं है। हालांकि, उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि शवों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए सरकार डीएनए परीक्षण कराने को तैयार है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को समयबद्ध सहायता, पारदर्शी प्रक्रिया और सम्मानजनक तरीके से न्याय सुनिश्चित करना है।
