वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताहांत तक ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई की तैयारी के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि संभावित कार्रवाई का उद्देश्य तेहरान पर दबाव बढ़ाना है।
हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक सैन्य अभियान की विस्तृत पुष्टि नहीं की गई है।
रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य ईरान को वार्ता की मेज पर लाने के लिए दबाव बनाना है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह घटनाक्रम जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए हमले के बाद सामने आया है।
इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने तेहरान के साथ जारी कूटनीतिक बातचीत को लेकर भी अनिश्चितता जताई थी।
ट्रंप ने क्या कहा?
रिपोर्ट के अनुसार, मैरीलैंड स्थित कैंप डेविड में कैबिनेट बैठक के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा,
“हम उन पर बहुत ज़ोरदार हमला करेंगे। एक समय ऐसा आएगा जब वे कहेंगे कि अब वे इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते।”
वहीं, CBS News की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी प्रशासन ईरान के ऊर्जा ढांचे, जैसे बिजलीघरों और पेट्रोलियम रिफाइनरियों, को संभावित सैन्य लक्ष्यों के रूप में विचार कर रहा है।
मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता
मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि आम नागरिकों द्वारा उपयोग की जाने वाली बुनियादी सुविधाओं को जानबूझकर निशाना बनाया जाता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
व्हाइट हाउस का बयान
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा,
“ईरान को तब तक कीमत चुकानी होगी, जब तक वह उस तरह से बातचीत के लिए तैयार नहीं हो जाता जिसे राष्ट्रपति ट्रंप उचित मानते हैं।”
उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखने की नीति जारी रखेगा।
तेल बाजार पर दिखा असर
CBS की रिपोर्ट सामने आने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। रिपोर्ट के अनुसार, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड ऑयल की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई, जिससे ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
क्षेत्रीय तनाव बना चिंता का विषय
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। इसके बाद ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद किए जाने की खबरों ने कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक की समुद्री आपूर्ति को प्रभावित करने की आशंकाएं बढ़ा दी हैं।
फिलहाल, क्षेत्र की स्थिति पर दुनिया की नजर बनी हुई है और संभावित सैन्य घटनाक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता व्यक्त की जा रही है।
